श्रद्धा और विश्वास का मिलन के साथ काशी विश्वनाथ की पावन नगरी में सिय-पिय महोत्सव का हुआ शुभारंभ

बक्सर अप टू डेट न्यूज़:- सिय-पिय मिलन महोत्सव की 52 वाँ महामहोत्सव भगवान अवढरदानी बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी काशी बनारस की धरा पर बुधवार से संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय बनारस में आयोजित की गई। इसकी जानकारी देते हुए समिति के मीडिया सहयोगी नीतीश सिंह ने बताया कि महोत्सव नौ दिनों तक चलेगा। सिय पिय मिलन महोत्सव की शुभारंभ सुबह श्री रामचरित्र मानस की पाठ से शुभारंभ हुई। साथ ही सुबह पोथी एवं कलश यात्रा महिलाओं द्वारा निकाला गया। जिसके बाद श्री भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा चित्रकूट मैदान धुपचण्डी से शुभारंभ हुआ।

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कार्यक्रम पूज्य संत श्री रामरज दास जी महाराज प्रेम सरोवर बरसाना धाम के सानिध्य में चल रहा है। वही, मामा जी महाराज के प्रथम शिष्य श्री रामचरित्र दास जी महाराज, मामा जी के लाड़ली बेटी सिया दीदी, रामलीला व्यास आचार्य श्री नरहरिदास जी महाराज के देख रेख में नौ दिवसीय कार्यक्रम की जायेगी। महोत्सव से आस-पास के इलाकों के हर घर में उत्सवी माहौल बन गया है।

रात्रि में गौरीशंकर विवाह का हुआ मंचन

सिय-पिय मिलन महोत्सव का श्रीगणेश श्रीगौरीशंकर विवाह लीला के साथ हुआ। जिसमें विश्व विख्यात पूज्य मामा जी महाराज के परिकरों ने भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह प्रसंग का जीवंत मंचन किया। जिसमें दिखाया गया कि राजा हिमाचल के घर उनकी पुत्री के रूप में माता पार्वती का अवतरण होता है। कुछ दिनों बाद देवर्षि नारद वहां पहुंचते हैं तथा हिमाचल के पूछने पर पार्वती के भविष्य के बारे में बताते हैं। जिससे उनके माता-पिता काफी चिंतित होते हैं। परंतु भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती जंगल में तपस्या करने जाती है। लेकिन उनके कठिन तप के बावजूद भगवान शिव का मन नहीं पिघलता है।

तब देवताओं के काफी प्रयास के बाद भगवान शंकर उन्हें अपना अद्र्धागिनी बनाने का वरदान देते हैं। तत्पश्चात शिवजी की बारात राजा हिमाचल के दरवाजे पर जाती है। बारात को देख वहां के लोग भयभित हो जाते हैं और आपस में तरह-तरह की चर्चाएं करते हैं। इधर बसहा पर सवार भोले बाबा के नंग-धड़ंग शरीर पर सांप व बिच्छू देख पार्वती की माता बिदक जाती है। बावजूद माता गौरी के संग भगवान शंकर की शादी संपन्न होती है।मंगलगीत शिव के पीताम्बर के लाले लाल छोर हे, भोला सिंदूर ले के दुलहिनि के माँग भरु, दुलहा हमार भोला-भाला हो, सब जग से निराला आदि गीतों के साथ विवाह संपन्न होता है।

श्रीराम जी प्रियांशु तो सौरभ बने शंकर जी

लीला में पार्वती के रूप में कुश, हिमालय- अनिमेष, मैना-राजेश, ब्रम्हा जी- बच्चा जी, इंद्र- पिंटू, नारद- श्याम प्रकाश, श्रीराम- प्रियांशु, शंकर जी – सौरभ, सप्तर्षि- महात्मा एवं अन्य, विष्णु- पुरुषोत्तम, भृंगी- नंद बिहारी मुख्य भूमिका में रहे। वही, नीतीश सिंह, सीताराम चतुर्वेदी, राम कृपाल सिंह, बांके, अरविंद, जयशंकर तिवारी, अशोक, रामू, गोपाल शर्मा, नमोनारायण समेत अन्य महराज श्री के परिकर मौजूद रहे।

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