विजयादशमी को क्यों नहीं जलाया जाता रावण का पुतला

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विजयादशमी के दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता|बल्कि एकादशी के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है।

विजयादशमी के दिन क्यों नहीं जलाया जाता रावण का पुतला

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /इटाढी :- बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में विजयदशमी पर रावण का पुतला दहन की परंपरा लगभग पूरे भारतवर्ष में निभाई जाती है। वही बक्सर के इटाढी प्रखंड में दशहरा के दिन रावण का पुतला नहीं जलाया जाता|बल्कि एकादशी के दिन रावण का पुतला जलाया जाता है।

इटाढी प्रखंड के कुकुढ़ा गांव में पूर्णिमा के दिन देर शाम रावण वध का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिनमें आसपास लोगों के साथ काफी भीड़ उमड़ पड़ी। बताया जाता है कि रामलीला समिति कुकुढ़ा के तत्वधान में प्रत्येक साल पूर्णिमा के दिन रावण वध का कार्यक्रम किया जाता है। लेकिन, इस बार पूर्णिमा के दिन रविवार होने के चलते सोमवार को विसर्जन किया गया।

रामलीला में दिखाया गया कि काफी देर तक राम और रावण में युद्ध चलता है। इसके बाद रावण के भाई विभीषण भगवान श्री राम को रावण की नाभि में अमृत के बारे में बताया। तब भगवान श्रीराम ने उसकी नाभि में बाण मार देते हैं, जिससे रावण का नाभि का अमृत सूख जाता है। और इस तरह से लंकापति रावण का अंत हो जाता है। इसके बाद रावण का विशाल पुतला का दहन किया जाता है।

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आखिर क्यों ? दशहरा के दिन नही जलाया जाता रावण का पुतला

बताया जाता है कि शास्त्रों के अनुसार श्री राम ने विभीषण के बताने पर रावण के नाभि में दशमी को तीर मारा था लेकिन रावण ने एकादशी के दिन प्राण त्यागा था | इसलिए कई जगहों पर एकादशी के दिन पुतला दहन होता है।

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