नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी है क्या?

“सी ए बी का ए बी सी” नागरिकता विधेयक भारत के लिए क्यों आवश्यक है?इसे समझना जरूरी है।

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नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी है क्या?

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- “सी ए बी का ए बी सी” नागरिकता विधेयक भारत के लिए क्यों आवश्यक है?इसे समझना जरूरी है।धार्मिक अधार पर भारत के बँटवारा होने के बाद वर्ष १९५० में जवाहर लाल नेहरू और पाक प्रधानमंत्री लियाकत अली खान के बीच दिल्ली में समझौता हुआ। समझौते में दोनों देश अपने यहाँ अल्पसंख्यकों की सुरक्षा,धर्म परिवर्तन नहीं करने से लेकर सभी प्रकार के नागरिक अधिकारों को देने का वचन दिया।इस समझौते का भारत ने तो पालन किया लेकिन पाक में अल्पसंख्यक धार्मिक भेदभाव और जुल्म के शिकार होने लगें।कई करोड़ लोग धर्म परिवर्तन एवं जुल्म सहते हुए भारत से मदद की आस में अत्याचार सहते हुए मर गए तथा कुछ अभी तक आस लगाये है।

वीरेन्द्र कश्यप
वीरेन्द्र कश्यप

विभाजन के समय पाक में अल्पसंख्यक करीब २२%जो अब करीब ३%है,बांग्लादेश में करीब २३%जो अब करीब ८%है। आखिर यह क्यों हुआ?कोई उतर दे सकता है?भारत इन देशों में हस्तक्षेप नहीं कर पाया।वर्तमान सरकार ने नागरिकता विधेयक संसद में पास करायी,जिससे भारत में हिन्दूओ,सिख,बौद्ध,जैन,पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को नागरिकता मिल सके।विधेयक द्वारा नागरिकता कानून १९५५ में संशोधन किया गया।

अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती थी

पहले अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती थी तथा कम से कम ११साल भारत में रहना अनिवार्य था।अवैध प्रवासियों को जेल में या विदेशी अधिनियम,१९४६ और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश)अधिनियम,१९२०के तहत वापस उनके देश भेजा जा सकता था।वर्तमान सरकार १९४६ एवं १९२०के इन कानूनों में संशोधन करके नियम को आसान कर दिया है।[metaslider id=2268]

निवास अवधि को एक से पाँच साल कर दिया है।आखिर इस विधेयक के विरोध का क्या कारण है?पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम,अरुणाचल प्रदेश,मिजोरम और मणिपुर में सबसे ज्यादा विरोध दिखा।इन क्षेत्रों में यह अाशंका पैदा किया गया कि इससे मूल लोगों के सामने पहचान और आजीविका का संकट पैदा होगा। शेष भारत में तुष्टीकरण के कारण विरोध किया जा रहा है।केंद्र सरकार ने ३१ दिसम्बर २०१४ तक पाकिस्तान,अफगानिस्तान,बांग्लादेश देश से आये हिन्दू,सिख,बौद्ध,जैन,पारसी एवं ईसाई धर्म के प्रवासियों को नागरिकता देने का फैसला किया है।यदि सी ए बी संसद से पास नहीं होता तो जुल्म सह होते असहाय नागरिक अपनी रक्षा अौर शरण के लिए किस देश की अोर देखेंगे? अाप भी विचार करें?

यह लेख नीजी विचार पर आधारित है।वीरेन्द्र कश्यप,सचिव-ग्रामीण स्वरोजगार उन्नयन एवं शोध संस्थान (रेडरी)

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