वेणीमाधव महाराज के पुण्यतिथि पर भण्डारे का आयाेजन

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श्रीराम मंदिर शान्ति धाम उधुरा के संस्थापक ब्रह्मलीन संत वेणीमाधव दास महाराज के 15 वी पुण्यतिथि पर उनके शिष्यों एवम भक्तो के द्वारा बहुत ही श्रद्धा पुर्ण तरीके से एवम बहुत शिद्दत के साथ याद किया गया।

वेणीमाधव महाराज के पुण्यतिथि पर भण्डारे का आयाेजन

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /ब्रह्मपुर:- महर्षि विश्वामित्र की पौराणिक धर्मनगरी बक्सर के ब्रह्मपुर क्षेत्र में श्रीराम मंदिर शान्ति धाम उधुरा के संस्थापक ब्रह्मलीन संत वेणीमाधव दास महाराज के 15 वी पुण्यतिथि पर उनके शिष्यों एवम भक्तो के द्वारा बहुत ही श्रद्धा पुर्ण तरीके से एवम बहुत शिद्दत के साथ याद किया गया। इस माैके पर अयोध्या से पधारे श्री श्री 1008 महामंडेलश्वर शिवरामदास महाराज उपाख्य फलाहारी बाबा व भक्तगणों ने संत वेणीमाधव दास जी मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया और उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला।

मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय मेरे गुरूवर की सेवा में समर्पित रहा-महन्त भरतदास

इस अवसर पर आश्रम के वर्तमान महन्त भरतदास महाराज ने कहा कि संत वेणीमाधव दास महाराज का भिवानी में विशिष्ट स्थान था। लाेग आपका बहुत ही आदर पूर्वक सम्मान करते थे। विद्वता में गुरु जी अपने आप में महान थे।आपका कोई जोड नहीं था आप अपने आप में अद्भुत एवम बेजोड थे।मुझे खुशी है की मुझे अपने सद्गुरु की सेवा करने का और उनके सामिप्य और सानिध्य में रहने का सुअवसर मिला था।मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय मेरे गुरूवर की सेवा में समर्पित रहा।

देश के हर प्रान्तों में उनके शिष्य है। गुरूदेव ने उधुरा में एक विशाल आश्रम की स्थापना की, जिसकाे मैं उनके आशिर्वाद से उनके पदचिन्हाें पर चलकर आगे बढ़ा रहा हूं और मन्दिर के उत्तराेत्तर विकास के लिए आजीवन संकल्पित भी हूं।

भरत दास जी ने अपने गुरूदेव के बारे में अश्रुपूरित नयनों एवम रूधे गले से कहा की हमारे गुरुदेव ने मुझे वो सब कुछ दिया जो अपने सांसारिक जीवन में मै कभी प्राप्त नही कर पाता।एक गरीब बालक को फर्श से उठाकर अर्श पर पहुंचा दिया।आपने दो कमरे के मकान में रहने वाले को इतने बडे सुसज्जित धार्मिक स्थल का प्रमुख बना कर मुझे भगवत कार्य से जोड दिया।उन्होंने सदा राम और गुरु का आश्रय लेने को कहा।

त्याग और परमार्थ का जीवन ही समाज का कल्याण करता-फलाहारी बाबा

श्री 1008 महामंडेलश्वर शिवरामदास महाराज उपाख्य फलाहारी बाबा ने कहा कि अपने कर्मो से बनायी हुई  कीर्ति ही मनुष्य को अमर बनाती है

त्याग और परमार्थ का जीवन ही समाज का कल्याण करता है।आपने कहा की गुरू का महत्व एवम गुरू के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।गुरू की महिमा अनंत है। गुरु बहुत कुछ देता है किन्तु सद्गुरु के माध्यम से मनुष्य को सबकुछ मिल जाता है। उन्होंने कहा की यहां दशहरे के दिन से सत्संग प्रारम्भ होगा जो प्रत्येक दिन शाम को चलाया जाएगा।

भरत दास जी महाराज से प्राप्त जानकारी के अनुसार मन्दिर के संस्थापक वेणीमाधव दास महाराज जी गृहत्याग के 60 वर्ष बाद जब अपने जन्मभूमि उधुरा लौटे तो मातृभूमि को समर्पित अपने इष्ट श्रीराम का मंदिर बनवाया था,जो आज इस क्षेत्र में नौलखा मंदिर के नाम से जाना जाता है।यह धाम सभी सुबिधाओं से पुर्णतया सुसज्जित है।बाग.गौशाला. विद्यालय. रसोई.धर्मशाला. सत्संग हाल.आकर्षक हवन स्थल समेत यहां सब कुछ बहुत ही सुव्यवस्थित ढंग से स्थापित है।

इस पूरे महाेत्सव की अध्यक्षता महंत भरतदास महाराज ने की।पुण्यतिथि के अवसर पर विशाल भण्डारे का आयाेजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में साधु संत व भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया।

अन्त में अयोध्या से आए श्री श्री 1008 महामंडेलश्वर शिवरामदास महाराज उपाख्य फलाहारी बाबा ने आए हुए साधु संत और विशिष्ट जनाें को अंगवस्त्रमदक्षिणा व स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुवे सभी को डिटाल साबुन देकर स्वागत-सत्कार किया।कार्यक्रम का कुशल संचालन शिक्षक राजेश राय ने किया।

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हार्टमन इण्टर कालेज के लोकप्रिय पूर्व प्रधानाचार्य फादर पी विक्टर के द्वारा श्री माधव कुंज अयोध्या के महंत महामण्डलेश्वर श्री श्री 1008 श्री शिव राम दास जी फलहारी बाबा को हारमोनियम भेंट किया गया जिसे हार्टमन इण्टर कालेज हार्टमन पुर के अभिभावक संघ के अध्यक्ष एवम वरिष्ठ पत्रकार विकास राय के द्वारा फलहारी बाबा को भेंट किया गया।
इस माैके पर पुजारी जगदीश दास,पुजारी रामदास, पत्रकार आशुतोष राय, पत्रकार विकास राय,अजय यादव पत्रकार झिंगुरी राय, दिनेश ,सोनू, शैलेन्द्र, राहुल,दिवाकर,प्रभात, अरविंद,रवि,हिमांशु त्रिपुरारी,राजू,रिशु,दीपक, प्रमोद,सुशील ओझा,अजय सिंह आदि भक्तगण उपस्थित रहे।

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