चौसा लड़ाई पर विशेष: हुमायूं की जान बचाने वाला चौसा का निजाम बना था बादशाह

बक्सर अप टू डेट न्यूज़/नीतीश सिंह :- सरकार अपने वादों को भूलती जा रही है| मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चौसा लड़ाई का मैदान विकसित करने का वादा किये थे| लेकिन दुर्भाग्य की बात है वो भूलते नजर आ रहे है| हालांकि जिला प्रशासन के द्वारा पार्क निर्माण का कार्य चल रहा है| 10 साल सेवा यात्रा पर निकले सीएम नीतीश कुमार बक्सर पहुचे थे जहां चौसा की लड़ाई मैदान में बने भवन में गुजारा किये थे| तब विरासत को संवारने के लिए मुख्यमंत्री ने कई घोषणाएं किये थे|new abloom services buxar

जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर पूरब चौसा में 26 जून 1539 को मुगल सम्राट हुमायूं और अफगान शासक शेरशाह सूरी के बीच सैन्य लड़ाई हुई थी। इस युद्ध में शेरशाह सूरी ने विजयी होने के बाद “फरीद अल दीन शेरशाह” का ताज पहना था। युद्ध में लगभग 8000 मुगल सैनिकों शेरशाह ने मार गिराया था|

अफगानी शासक शेरशाह ने मात्र एक घंटा के युद्ध में मुगल सम्राट हुमायूं को अपनी जान बचाने के लिए गंगा नदी में कूद पड़ा था| उफनती गंगा में कूदने के साथ ही वह डूबने भी लगा, तभी उस पर यही के निजाम नामक भिस्ती की नजर उस पर पड़ी। निजाम भिस्ती ने मशक के सहारे उसे बचाकर गंगा पार कराया। निजाम भिस्ती चौसा का स्थानीय समान्य नागरिक था|

निजाम भिस्ती ने एक दिन की बादशाहत में चलवाया था चमड़े का सिक्का

जब मुगल सम्राट हुमायूं पुनः दिल्ली के तख्त पर बैठा तो अपने प्राण बचाने के एहसान के बदले एक दिन की बादशाहत दी। निजाम भिस्ती ने एक दिन की बादशाहत में चमड़े का सिक्का चलवा दिया। यह सिक्के आज भी पटना संग्रहालय समेत देश के अन्य म्यूजियम में रखें ग‌ए है।

अपने अनूठे निर्णय से चौसा के निजाम भिस्ती का नाम इतिहास में बादशाह के रुप में दर्ज हो गया।लेकिन दुर्भाग्य की बात ये है की चौसा का एक समान्य नागरिक एक दिन के लिए ही सही दिल्ली के तख्त पर बैठा यह कोई छोटी बात नही है| लेकिन निजाम भिस्ती का नही जिला में प्रतिमा लगा है और नाही चौसा में| हालांकि निजाम भिस्ती का नाम का जिक्र युद्ध मैदान में बने स्तूप पर वर्णन है|

अकबर और जहांगीर जैसे महान बादशाह बैठे, उस पर बक्सर का यह भिस्ती बैठ चुका था. ऐसे में इससे बड़ी विडंबना क्या होगी, बक्सर का इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि जिसकी मिट्टी का लाल मुगलिया सल्तनत के तख्त पर बैठा, वह उपेक्षा के कारण यहीं पर गुमनामी के अंधेरे में डूब चुका है|

Special on Chausa Battle: खोदाई में मिली थी मूर्तिया
खोदाई में मिली थी मूर्तिया

खोदाई में मिली थी मूर्तिया और लगभग डेढ़ फिट का जूता

चौसा युद्ध मैदान में बिगत 2011 में खुदाई की गई| खुदाई के दौरान लगभग आठ-आठ फिट का इंसानों का कंकाल और करीब सैकाडो टेराकोटा की मुर्तिया मिली है| काफी मोटी क्षतिग्रस्त मन्दिरों का हिस्सा भी मिला है| वही एक डेढ़ फिट का जूता भी खुदाई से मिला है|

लगभग डेढ़ फिट का जूता Special on Chausa Battle
लगभग डेढ़ फिट का जूता

चौसा युद्ध मैदान में लगनी चाहिए निजाम भिस्ती की प्रतिमा

स्थानीय ग्रामीण नागेन्द्र सिंह,कमलजीत सिंह,परमोहन सिंह बताते है की केंद्र और बिहार सरकार की पहल पर यहा निजाम भिस्ती की प्रतिमा मूर्ति लगानी चाहिए, ताकि यहां के लोग स्वर्णिम इतिहास से वाकिफ हो सकें, निजाम को लोग जान सके, पहचान सके|

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