लॉकडाउन से चैती छठ पर दिख रहा असर

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लॉकडाउन से चैती छठ पूजा पर असर देखने को बिहार में मिल रहा है. लॉक डाउन होने की वजह से इस पर्व को इस बार बहुत कम ही घरों में मनाया जा रहा है.

लॉकडाउन से चैती छठ पर दिख रहा असर

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- वर्ष में दो बार छठ महापर्व मनाया जाता है पहला चैत और दूसरा कार्तिक मास में। शनिवार से शुरू हो रही चैती छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान।लोक आस्था के महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शनिवार को चैत्र शुक्ल चतुर्थी के नहाए खाए से शुरू हो रहा है। छठ पूजा प्रत्यक्ष देव भगवान भास्कर की उपासना का पर्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ सूर्य देव की बहन है, मान्यता यह है कि सूर्योपासना छठ माता प्रसन्न होती है तथा सुख-दुख धन-धान्य से परिपूर्ण करती हैं।

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नहाए खाए एवं खरना के प्रसाद से दूर होते हैं कष्ट

छठ महापर्व के प्रथम दिन नहाए खाए में लौकी की सब्जी, अरवा चावल, चने की दाल, आंवले की चासनी के सेवन का खास महत्व है। वैदिक मान्यता है कि इसे पुत्र की प्राप्ति होती है। वही वैज्ञानिक मान्यता है कि गर्भाशय मजबूत होता है खरना के प्रसाद में ईंख के कच्चे रस, गुड़ के सेवन से त्वचा रोग, आंखें पींडा समाप्त होती है। वहीं इसके प्रसाद से तेजस्विता निरूकता एवं बौद्धिक क्षमता वृद्धि होती है।

आरोग्यता एवं संतान के लिए उत्तम छठ व्रत

सूर्य षष्ठी का व्रत आरोग्यता सौभाग्य एवं संतान के लिए किया जाता है और स्कंद पुराण के मुताबिक राजा प्रियवत ने व्रत रखा था उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था भगवान भास्कर से इस रोग के मुक्ति के लिए उन्होंने छठ व्रत किया था। स्कंद पुराण में प्रतिहार षष्टि के तौर पर इस व्रत की है।

बता दें कि लॉक डाउन का असर चैती छठ पूजा पर देखने को बिहार में मिल रहा है. लॉक डाउन होने की वजह से इस पर्व को इस बार बहुत कम ही घरों में मनाया जा रहा है. सरकार के तरफ से साफ हिदायत दी गई है कि कोरोना जैसी बीमारियों से अगर बचना है, तो लोगों को सोशल डिस्टेंस बना कर रखना पड़ेगा. लोग लॉक डाउन होने के वजह से अपने घरों से निकलने से भी परहेज कर रहे हैं।

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