कांच ही बास के बहंगिया, बहंगी लचकत जाइ

छठ के उ गीत “कांच ही बास के बहंगिया, बहंगी लचकत जाइ।”अउरी “दउरा उठाव ना फलाना बाबू चल छठी घाटे नु हो, अरघ के बेरा बीतल जाता सुरुज डूबल जाता नु हो” सुन के हमनी के शरीर के रोम-रोम रोमांचित हो उठे ला।
छठ हमनी के संवेदना, संस्कृति, भावना, धर्म , इत्यादि में बसल बा। एकरा बिना हमनी के बिहार अधूरा लागेला।

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कांच ही बास के बहंगिया, बहंगी लचकत जाइ

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /सम्पादकीय :- छठ खाली एगो त्योहार ना ह , उ हमनी के बिहार के लोग खातिर एगो भावना है । छठ एगो बहाना ह कई बरिस पहले घर छोड़ के जे बाहर निकल गइल बा कमाए खातिर, उ लोग के घर वापिस आवे के छठ एगो बहाना ह।

फेर से परिवार के संगे माई के हाथ के बनल ठेकुआ खाए के अउरी मय दोस्त साथी से मिले के बहाना ह।
छठ त्योहार हमनी के दिल में बसेला, ओहघरी बहुत दुख होला जब बरिस दिन के दिन छठ में घरे जाए के ना मिलेला?
कतना इन्तेजार रहेला एगो पत्नी के अपना पति खातिर, एगो माई के अपना बेटा खातिर, एगो बहिन के अपना भाई खातिर, एगो बेटा-बेटी के अपना बाप खातिर।

छठ के उ गीत “कांच ही बास के बहंगिया, बहंगी लचकत जाइ।”


अउरी “दउरा उठाव ना फलाना बाबू चल छठी घाटे नु हो, अरघ के बेरा बीतल जाता सुरुज डूबल जाता नु हो”
सुन के हमनी के शरीर के रोम-रोम रोमांचित हो उठे ला।
छठ हमनी के संवेदना, संस्कृति, भावना, धर्म , इत्यादि में बसल बा। एकरा बिना हमनी के बिहार अधूरा लागेला।

आ बक्सर के छठ के का कहे के बा। बक्सर धार्मिक नगरी त हइये ह, हमेशा एहिजा केवनो ना केवनो तीज-त्योहार त मनत रहेला पर जब छठ आ जाला तब एकर खूबसूरती अउरी बढ़ जाला।

जब सुमेश्वर स्थान गंगा घाट से लेके सरिमपुर पुल तक अउरी सारीपुल से आगा तक के गंगा जी के घाट पर छठ करे वाला लोग के जब जमघट लागेला तब गंगा जी के पानी मे स्टीमर भा नाइ से गंगा जी के किनारे छठ घाट के नजारा देख के मन प्रफ्फुलित तथा रोमांचित हो जाला।prakash buxar

बक्सर शहर में छठ में जमघट त लागले रहेला लेकिन बक्सर के गांव भी कम गुलजार ना भइल रहेला। केवनो-केवनो गांव में त छठ के दिने संस्कृति कार्यक्रम, नाटक, बिरहा, देवी जागरण तक होला।

अगर असली गांव के गवई छठ देखे बा त डुमरांव, ब्रह्मपुर, राजपुर क्षेत्र के गांव में देखी सभे।
एगो अलगे आनंद के अनुभूति होइ अउर गजब के ऊर्जा तथा उत्साह मिलेला।buxar bjp add

यानी कुल्ह मिला जुला के अपना घर आके अगर छठ ना देखनी त कुछु ना देखनी, मय त्योहार छठ के आगे फीका लागेला।

सभका के छठ के हार्दिक बधाई तथा शुभकामना बा। छठ माई रउवा सभ पर आपन हमेशा कृपा बनवले राखस।

प्रभाकर मिश्रा

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