गंगा का रौद्र रूप : गंगा की तेज आहट से दियारा वासियों की बढ़ी बेचैनी

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /सिमरी :- गंगा के बढ़ते जलस्तर से दियारा में परेशानी बढ़ गई है सिमरी प्रखंड के गंगा तटबंध के केशोपुर माणिकपुर दादा बाबा के डेरा छोटका राजपुर, श्रीकांत के डेरा, तिलक राय के हाता गंगौली, राजापुर सहित दियारा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में 50 हजार से अधिक की आबादी घिर जाता हैं । करीब हजारों एकड़ में लगातार गंगा के बढ़ते जलस्तर से क्षेत्र में बाढ़ का खतरा उत्पन्न होने लगा है लोगों को 2016 में आई भयावह बाढ़ का डर सताने लगा है।

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बढ़ते जलस्तर से जहां किसानों की फसल में मक्का, सोयाबीन, बाजरा सहित रोज नकदी फसल (सब्जी) के डूबने कि चिंता सताने लगा है जिससे किसानों के सामने आर्थिक समस्या उत्पन्न होने लगती है। साथ ही इलाके के किसान पशु पर आधारित रहते हैं। उनके सामने पशुचारे की समस्या उत्पन्न हो जाती हैं। जान जोखिम में डालकर पशुचारा को काटने के लिए लोग विवश ररहते हैं उल्लेखनीय है कि गंगा तट पर स्थित लगभग दर्जनों गांवों में बाढ कि समस्या आमूमन बना रहता है लेकिन बाढ पीडितों के लिए सरकार एवं प्रशासन की बादे हर बर्ष खोखला रहता है|

दियारा क्षेत्र की फसलें डूब गई

ग्रामीणों का कहना है कि,गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण बांध से सटे दियारा क्षेत्र की फसलें डूब गई हैं प्रभावित किसानों ने बताया कि जलजमाव से पशुओं के लिए खेतों में लगी फसल एवं पशुचारा डूब जाने से भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है प्रशासन के द्वारा एक भी नाव नहीं देने से आमजनों को मजबूर होकर फैले पानी में तैरकर पशुओं के लिए चारा लाना पड़ता है।

इसके अलावा स्थानीय लोगों ने बताया कि नाविक अपनी नाव देने के नाम पर बताते हैं कि पूर्व बर्षों में आई बाढ़ में प्रशासन को सौंपी गई नाव का किराया लंबित रहने के कारण नाव देने से इंकार करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बाढ़ की विभिषिका झेल रहे पीडि़त को सिर्फ ईश्वर ही एकमात्र सहारा है। जिला प्रशासन के एक भी अधिकारी प्रभावित इलाके में झांकने तक नहीं आए हैं।

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