मानस का सार है सत्य, प्रेम, करुणा-बापू

रामहि सुमिरिय यह सत्य है। राम ही गाइय यह प्रेम है। सतत सुनिय यह करुणा है। रामकथा के मानसरोवर तट पर पहुंचने के लिए कई बाधाएँ आती है लेकिन करुणा पहुंचा देती है। मानस का सार है सत्य,प्रेम,करुणा।

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बक्सर अप टू डेट/ए0एन0चंचल– गंगा के तट पर महामुनि विश्वामित्र जी के शुभ आश्रम में परम पूज्य खाकी बाबा के पुण्य स्मृति में और परम पूज्य मामा जी की स्मृति में सिय पिय मिलन महोत्सव के स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित श्री राम कथा अंतर्गत मानस अहल्या को केंद्र में रखते हुए नवम दिवस की सात्विक-तात्विक संवाद अंतरराष्ट्रीय संत रामकथा वाचक मोरारी बापू ने की।

सर्वप्रथम उन्होंने सभी को विवाह पंचमी की शुभकामनाएं दी। कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए बापू ने कहा कि वैसे तो मानस के सातों सोपान एक-एक शब्द में भी कहे जा सकते हैं और अनंत काल तक कोई उसकी चर्चा करें तो भी उसका अंत होने वाला नहीं है।

मानस जी के सात सोपान की एक-एक शब्द में व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि बालकांड- यह वर्षण का कांड है। इसमें आनंद, उत्साह, प्रसन्नता, जयकार वर्षा हो रही है।

बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गृह-गृह नगर दुंदुभी बाजी।।

अयोध्या कांड दर्पण का कांड है। महाराज दशरथ ने अपना चेहरा दर्पण में देखा और पूरी कथा आगे बढ़ गई। अयोध्या कांड की शुरुआत निज मन मुकुर सुधार से हुआ है।
एक समय सब सहित समाजा।                                                                                                राज सभा रघुराज बिराजा।                                                                                                    राय सुभाय मुकुर कर लीन्हा।
बदन बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।।
श्रवण समेत भये सीत केशा।
मनहुँ जरठपन अस उपदेशा।।

अरण्यकांड कर्षण करता है। आकर्षण करता है। सूर्पनखा जैसी तामसी स्त्री का भी आकर्षण हुआ।  तुम्ह सम पुरुष न मो सम नारी।खर दूषण को भी आकर्षण हुआ।

किष्किंधा कांड प्रवर्षण का कांड है। सुंदरकांड मां जानकी के दर्शन का कांड है। लंका कांड घर्षण का कांड है। उत्तरकांड तर्पण का कांड है।

भुसुंडि रामायण के अनुसार रामकथा का स्वर गायन करते हुए रामचरितमानस की कथा समास विधि से पूरी की गई।

प्रभु ने अपनी जन्मभूमि को प्रणाम किया और प्रभु के सखा गण विमान से उतरे तो सब मनुज हो गए। भगवान को ही अवध में आना है तो मनुज अवतार में आना पड़ा।

मां कैकई लज्जित हैं यह जानकर प्रभु सबसे पहले कैकई के महल में गए और उनसे मिले।

श्रद्धालुओं से अपील करते हुए बापू ने कहा कि आप भी भगवान राम की तरह आज तक जीवन में आप से किसी का अनबनाओ हो गया हो। किसी के कारण से तुमको तकलीफ हुई हो और कोई संकोच में पड़ा हो तो कथा सुनकर यहां से निकलने के बाद पहले उसके घर जाना। जो तुमसे बोलता नहीं है। मतलब तुम्हारे साथ जिसकी अनबन है। उससे मिलना होगा। ऐसा होना चाहिए।st join buxar

बापू ने आगे कहा कि राम सिंहासन के पास नहीं गए। सिंहासन राम के पास आया। जब हम सत्ता के पास जाते हैं। तब यह भव्य तो होती है लेकिन सत्ता जब सत्य के पास आती है। तब यह दिव्य भी हो जाती है और यह दिव्य तब जन्म जन्मांतर किसी के लिए भी से भी हो जाती है।

राम राज्य मतलब प्रेम राज, प्रेम राज मतलब त्याग राज।

भुशुण्डिजी ने कथा को विराम दिया गरुड़ बैकुंठ गये याज्ञवल्क्य ने कथा को विराम दिया वह अभी तक स्पष्ट नहीं है। भगवान शिव ने भी कथा को विश्राम दिया।

कलि पावना अवतार पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी शरणागति के घाट पर बैठकर अपने मन को कथा सुनाते, संत सभा को कथा सुनाते, दीनता के घाट से कथा को विराम देते हुए। हमें तीन संदेश देते हैं। दो पंक्ति में तीन सूत्र प्रदान किए हैं।
यह कलिकाल न साधन दूजा।                            जोग जग्य जप तप व्रत पूजा।।।                           राम ही सुमिरिय गाइए रामहि।                           सतत सुनिय राम गुण ग्रामहि।।

राम का सुमिरन यह सत्य है। सत हरि भजन जगत सब सपना।

राम को गाना मतलब प्रेम। मीरा ने प्रेम किया तो गाती रही। नरसी ने प्रेम किया तो गाते रहे। एकनाथ ने, नामदेव ने प्रेम किया गाते रहे। गोस्वामी जी ने प्रेम किया गाते रहे। जिन्होंने प्रेम किया वो तो गाता ही है। मामा जी ने प्रेम किया तो जिंदगी भर गाते रहें।

हर दिल जो प्यार करेगा, वह गाना गाएगा।
और कभी ना कभी दीवाना सैकड़ों में पहचाना जाएगा।।

रामहि सुमिरिय यह सत्य है। राम ही गाइय यह प्रेम है। सतत सुनिय यह करुणा है। रामकथा के मानसरोवर तट पर पहुंचने के लिए कई बाधाएँ आती है लेकिन करुणा पहुंचा देती है।

मानस का सार है सत्य,प्रेम,करुणा।

सत्य के साथ चलो जितना चल सको। प्रेम के पीछे चलो, जहां प्रेम देखो पीछे चलो और करुणा को अपने पीछे रखो। तुम आगे चलो एक भरोसा लेकर के कि मेरे पीछे की किसी की करुणा चल रही है।

युवाओं को अपील करते हुए कहा कि ये तीन सूत्र युवा लोग समझे। राम भजन से अधम से अधम को गति मिली है।

चारों परम आचार्यों ने अपने अपने जगह कथा को विराम दिया। आज इन सभी आचार्यों की करुणा छाया में बैठकर हम सब मामा जी के इस बक्सर धाम में नौ दिवसीय राम कथा मानस अहल्ला का गायन कर रहे थे, श्रवण कर रहे थे।

एक दृष्टांत सुनाते हुए उन्होंने कहा कि एक प्रोफेसर ने अपने 40 छात्र के वर्ग में एक प्रश्न पत्र दिया और सब से कहा कि उसको उल्टा रख दो, पढ़ना मत। यह सरप्राइस टेस्ट है आपका सब हैरान। किसी प्रकार के परीक्षा का समय नहीं और प्रश्न दिया जा रहा है और कहा जा रहा है खबरदार देखना मत। सबने प्रश्न पत्र को मेज पर उलट कर रख दिया।

फिर उस प्रोफेसर ने जवाब लिखने के लिए एक और कागज दिया और कहा मैं जब कहूं पेपर उल्टा करके पढ़ लेना और उत्तर इस पेज पर लिख देना। कई छात्र तो घबराए कि ऐसे सरप्राइस टेस्ट हम उस में कहीं फेल हो गए तो? आपका क्या इरादा है? प्रोफेसर ने कहा है धैर्य रखो। कोई बात नहीं। यह कोई वार्षिक परीक्षा नहीं है। मुझे जानना है कि मेरे छात्र कहां तक पहुंचे हैं। घबराइए मत उसके बाद प्रोफेसर साहब ने कहा प्रश्न पत्र उलटिये और प्रश्न पढ़कर उसका उत्तर लिखिए।

छात्र सब के सब हैरान हो गए यह क्या माजरा है?

जब प्रश्नपत्र पढ़ने लगे छात्र सब के सब हैरान हो गए यह क्या माजरा है? एक भी प्रश्न लिखा हुआ नहीं था। एक कोरा कागज है साहब। यह तो कोरा कागज है। प्रोफेसर ने कहा जरा गौर से देखो। छात्रों ने कहा कि कुछ है ही नहीं तो। प्रोफ़ेसर ने कहा जरा और गौर से देखो। प्रोफेसर प्रश्न-पत्र में क्या किए थे कि बहुत ही छोटी बिंदु काले पेन से कर दिए थे।

उस सफेद कागज के बीच में तब सबने गौर से देखा और कहा एक छोटी सी बहुत ही सूक्ष्म काली बिंदु है। बस आपको इसी का जवाब लिखना है। प्रोफेसर साहब ने कहा कि अब इसका जवाब आप लोग अपने उत्तर पुस्तिका में लिखिए और उस कागज को दीजिए।

1 घंटे का समय है आपके पास। आपको जो समझ में आए वही लिखिए। समय का ख्याल रखिए। प्रोफेसर साहब आराम से बैठ गये। प्रोफेसर ने मॉनिटर से कहा सबकी उत्तर पुस्तिका इकट्ठा करके ले आओ। प्रोफेसर साहब ने उसका जांच करना शुरू किया।

बहुत अच्छा एक लिखा की काला बिंदु बहुत सूक्ष्म है।

किसी लिखा एक काला बिंदु है। किसी ने लिखा उसका रंग काला है। दूसरे ने कहा ऐसा भी कोई परीक्षा होता है। आखिर में एक विद्यार्थी ने लिखा। लेकिन सब ने लिखा इससे बहुत अच्छा एक लिखा की काला बिंदु बहुत सूक्ष्म है। लेकिन चारों ओर सफेद कागज बहुत बड़ा है। उसने उसको पास कर दिया।

अहल्या के जीवन में काला बिंदु बहुत सूक्ष्म है। लेकिन हम उस पर ही लेख लिखते हैं कि काला बिंदु है। ऐसा है वैसा है। लेकिन उसकी जो शुद्धता है, सफेदी है, चारों ओर कि वह हमें हमने निगाहों से देखी नहीं।

मुझे आखिरी दिन यही कह कर इस व्यासपीठ से प्रणाम करके विदा लेनी है। क्योंकि हम एक छोटी सी चूक वही देखने के आदि हो गए हैं। अच्छाइयां कितनी चारों ओर भरी पड़ी है। यह अहल्ला ना होती तो शायद अहल्या का उद्धार राम नहीं करते। तो मैं रामकथा नहीं कहता।

राम के बिना कोई पढ़ नहीं पाया। क्योंकि शिलालेख पुरातत्व विभाग का मामला है।

युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में छोटी सी चूक हो जाए तो उसको कोसो मत। इसके सामने आपके माता-पिता कितने उदार हैं? यह देखो। अहल्ला शीला नहीं है, शिलालेख है। राम के बिना कोई पढ़ नहीं पाया। क्योंकि शिलालेख पुरातत्व विभाग का मामला है।

अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि कल मैं सेंट्रल जेल में कैदियों से मिलने गया मैंने उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में 4 वस्तु हैं भूल, गुनाह, अपराध,पाप। इनमें से आपने क्या किया? उसका जरा आत्म चिंतन कर लो। भूल सामान्य है। गुनाह जिसके लिए कानून है। अपराध के लिए बड़ों से क्षमा मांगना और पाप के लिए प्रायश्चित। यह आत्म खोज का विषय है।

नौ दिवसीय श्री रामकथा का बिल्कुल रस भरा फल शतानंद माता के चरणों में समर्पित कर रहा हूँ। सीताराम विवाह महोत्सव की बधाई एवं गीता जयन्ती की एडवांस में बधाई के साथ ही मानस अहल्या के कथा का विश्राम हुआ।

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