पार्क में लगी खेलकूद सामग्री सिर्फ शोभा की वस्तु बनी

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जिला प्रशासन आनन-फानन में इन सामग्रियों को खरीद कर ऐसे ऐसे जगहों पर लगा रखा है जो केवल शोभा की वस्तु बनकर रह जाएगा।

पार्क में लगी खेलकूद सामग्री सिर्फ शोभा की वस्तु बनी

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- जब से जिले में नए जिलाधिकारी अमन समीर का आगमन हुआ है और उनके द्वारा अपने आगमन के दिन ही बक्सर शहर का देर रात औचक निरीक्षण किया गया। और अपने पहले प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने शहर की साफ-सफाई को लेकर जितना गंभीरता दिखाई दी। उतना शायद अब तक किसी और जिलाधिकारी के अंदर बहुत कम देखने को मिला है। उनके द्वारा साफ निर्देश दिया गया है कि साफ-सफाई को लेकर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और धार्मिक नगरी को बदबूदार नहीं बनाने दिया जाएगा।

बहरहाल ग्राउंड चेकअप के लिए क्षेत्र में भ्रमण किया गया और देखा कि नगर परिषद के द्वारा शहर को जितना साफ सुथरा रखने का प्रयास किया जा रहा है परंतु दुर्भाग्य है यह कहा जाएगा कि शहर के मुख्य मंदिर, घाट, चौराहे, मैदान और पार्क के समीप इतनी बड़ी गंदगी है कि बाहर से आने वाले लोग हैं यह जरूर कहेंगे कि इतनी बड़ी धार्मिक जगह पर आए कि यहां गंगा है, गुरु विश्वामित्र की नगरी है, भगवान राम की तपोभूमि है, बड़े-बड़े ऋषि और संतों का जगह है पर ऐसा जगह को नरकी रूप में रखा गया है।

इस मामले में नगर परिषद अभियंता से हमारी बात हुई तो उन्होंने कहा कि साफ-सफाई की व्यवस्था एक एनजीओ के जिम्मे दी गई है और उसको जिम्मेदारीपूर्वक कहा गया है कि शहर के कूड़े कचरे को शहर के अंदर किसी भी जगह पर नहीं फेंकना है फिर भी अगर फेंकने की बात सामने आ रही है तो इसकी जांच की जाएगी और ऐसे दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

शहर के अंदर कूड़ा कचरा फेंक कर केवल खानापूर्ति कर रही है-

दरअसल किला मैदान से सटे नाथ बाबा मंदिर के तरफ जाने वाले नहर के दोनों साइड में किले के पास एवं मंदिर के पास कितने शहर के कूड़े-कचरे नगर परिषद द्वारा डाले गए हैं. कि उस जगह पर सुअरों का बसेरा बन गया है। वहां पर लोग दस मिनट भी नहीं ठहर पाएंगे। सबसे अजीब बात यह देखने को मिली है किस शहर की साफ सफाई के मद्देनजर कूड़े-कचरे के ढेर के लिए अब तक शहर से बाहर कोई जगह चिन्हित नहीं किया गया है और अंततः जो एनजीओ को यह जिम्मेवारी दी गई है।

वह एनजीओ अपनी खानापूर्ति के लिए शहर के कूड़े कचरे को या तो किला मैदान के समीप वाली नहर के पास फेंक देती है या तो बाईपास सड़क के किनारे नहर में फेंक देती है। जिसके चलते कई तरह की बीमारियां भी फैलने का डर लोगों को सताने लगा है।

शहर के कूड़े के ढेर को शहर से बाहर डंपिंग करने के लिए अब तक नहीं हो पाया है जगह चिन्हित:-

कई सामाजिक संगठनों से हमारी टीम ने वार्ता की तो बताया गया कि नगर परिषद इतना लापरवाह है कि वह शहर के जमे कूड़े-कचरे की डंपिंग के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं कर पाया है। यही नहीं जिस नाथ बाबा घाट पर कूड़े-कचरे डाले जा रहे हैं वह बगल में ही जिला नजारत की तरफ से लाखों रुपए खर्च करके पार्क भी बनाया गया है।

परंतु संडास के चलते उस पार्क में लोग जाने से कतराते हैं। कुछ सामाजिक एवं राजनीतिक लोगों से जब हमारी बात हुई तो उन लोगों ने कहा कि मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत शहर में पार्क की व्यवस्था एवं पार्कों में खेलकूद एवं व्यवायम के लिए खेलकूद सामग्री रखने की हिदायत जिला प्रशासन को दी गई परंतु जिला प्रशासन आनन-फानन में इन सामग्रियों को खरीद कर ऐसे ऐसे जगहों पर लगा रखा है जो केवल शोभा की वस्तु बनकर रह जाएगा।

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किला मैदान में लगने वाले व्यायाम के लिए एवं बच्चों की खेलकूद के लिए जो सामग्री लगी है वह कूड़े के ढेर में लगी हुई है। जहां पर लोग जाना पसंद नहीं कर रहे हैं। लोगों की मांग है कि इस सामग्री को या तो किसी पार्क में या तू किसी स्कूल के मैदान में लगाया जाए ताकि लोग इसका खूब फायदा उठा सकें। हालांकि जिलाधिकारी अपने जिले के कार्यों का अवलोकन कर रहे हैं उम्मीद है कि उनके मार्गदर्शन में लोगों को काफी फायदा मिलने वाला है।@राष्ट्रीय सहारा ब्योरो चीफ जितेंद्र कुमार मिश्रा

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