श्री रामायण एक्सप्रेस और बक्सर की राजनीति- विवेक की कलम से

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अपने प्रिय बक्सर की पुण्य भूमि पर गर्वित राष्ट्र की अलौकिक विभूति श्री रामायण एक्सप्रेस का ठहराव होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक ट्रेन का हमारे अपने प्रिय शहर में ठहराव होना ही मुझ जैसे अनेकों धरा पुत्रों के लिए अपार हर्ष और गर्व का विषय है।

श्री रामायण एक्सप्रेस और बक्सर की राजनीति- विवेक की कलम से

बक्सर अप टू डेट न्यूज़/विवेक कुमार ‘हिन्दू’:- आईये थोड़ा सा पीछे चलते हैं। सिर्फ 6 वर्ष पीछे। 6 वर्ष पूर्व तक बक्सर जो था वह अमेरिका के बोस्टन जैसा खूबसूरत और विकसित नगर हुआ करता था। बड़े बड़े समुद्री बीच, डबल ट्रिपल डेकर फ्लाईओवर, लोगों के अपने याट से लेकर प्राइवेट प्लेन जो अनेकों निजी पोर्ट व हवाई अड्डो से सरपट भागते रहते थे।

लोग इतने खुशहाल थे कि रोज दिन में होली और रात में दिवाली होती थी। कांग्रेस राज में तो बस यूं समझ लीजिए कि अगर कोई बाहरी व्यक्ति कभी बक्सर आ जाये तो उसे यकीन ही नही होता था कि ऐसा कोई शहर बिहार छोड़िये भारत मे भी हो सकता है।

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चाहे वह पर्यटन हो, शिक्षा हो, चिकित्सा हो या औद्योगिक क्रांति हो, बक्सर मानों रोज ही नए कीर्तिमान गढ़ और संवार रहा था। और यह सब एक दिन में नही हुआ था। इसके पीछे लगभग 55 वर्षों तक केंद्र में और 58 वर्षों तक बिहार में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कुशल सुशासन था। इसी सुरमई समयचक्र में एक वो भी समय था जब यहाँ के एक सांसद केंद्र में भी सिर्फ उच्च स्तर के मंत्री ही नही थे वरन बड़े पेड़ के गिरने के बाद धरती हिलाने वाले प्रधानमंत्री के खासे प्रिय भी थे। यहाँ तक कि कुछ लोग तो उस काल अवधि को बक्सर का स्वर्णयुग तक कह देते हैं।

लेकिन समय भला स्थिर रहा है कभी? बक्सर में भी नही रहा। शायद कुछ लोगों को बक्सर की यह अमेरिका टाइप प्रगति रास नही आई और कांग्रेस और वामपंथी प्रतिनिधियों को हटा कर भाजपा के प्रतिनिधि आ गए। और धीरे धीरे नही अचानक से सब कुछ बदल गया। खासतौर पर विगत लगभग 6 वर्षों में।

तो अब असल मुद्दे पर आते हैं।

आज हमारे अपने प्रिय बक्सर की पुण्य भूमि पर गर्वित राष्ट्र की अलौकिक विभूति श्री रामायण एक्सप्रेस का ठहराव होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक ट्रेन का हमारे अपने प्रिय शहर में ठहराव होना ही मुझ जैसे अनेकों धरा पुत्रों के लिए अपार हर्ष और गर्व का विषय है। ऐसा मैं इस लिए कह रहा हूँ कि प्रथमदृष्टया इस ट्रेन का ठहराव ना तो बक्सर में था और ना ही बक्सर इस बहुचर्चित श्री रामायण परिपथ में शामिल था।

आज यह ऐतिहासिक ट्रेन बक्सर आ रही है।

सोशल मीडिया, पत्र, अख़बार और व्यक्तिगत सम्पर्को के माध्यम से मुझ जैसे अनेकों लोग बक्सर से निर्वाचित माननीय सांसद महोदय को इस परिपथ में बक्सर को भी शामिल करने हेतु बारंबार सजग आग्रह करते रहे। हालांकि वो स्वयं ही इस मुद्दे पर स्वतः संज्ञान ले कर कार्य कर रहे थे फिर भी हम सभी ने जो भी सुलभ माध्यम हो सके, उसके माध्यम से अपनी बातें उनके अलावा माननीय प्रधानमंत्री, रेलमंत्री व पर्यटन मंत्री तक पहुँचाने का लगातर प्रयत्न माननीय सांसद महोदय के नेतृत्व में किया। और अंततः हम सभी के प्रयास फलीभूत हुए और आज यह ऐतिहासिक ट्रेन बक्सर आ रही है।

लेकिन जो लोग उस बोस्टन वाले स्वर्णयुग से बाहर नही आ पा रहे हैं वो फिर से उसी युग मे वापस जाने का पुरजोर प्रयत्न करते हुए कह रहे हैं कि बक्सर में दिखाईयेगा क्या? बिल्कुल ठीक कह रहे हैं आप और मैं भी सहमत हूँ इस बार आपसे तो। लेकिन ये सवाल आप पूछ किस से रहे हैं? ये सवाल आपने उनसे क्यों नही पूछे जिनकी विकास योजनाओं की राशियाँ बिना खर्च हुए वापस चली गयी?

संचालन के लिए अभी के वर्तमान सांसद बधाई के पात्र हैं।

सनद रहे कि बक्सर में ऐसी अनेकों दीर्घकालिक योजनाएं चल रही हैं जिनके पूर्ण होने पर ना सिर्फ बक्सर बल्कि बिहार का नाम भी चमकेगा। अभी हाल ही में क्रियान्वित कैंसर डिटेक्शन सेंटर को छोड़ दीजिए उसके बाद भी चाहे वो नर्सिंग कॉलेज हो, चिकित्सा महाविद्यालय हो, थर्मल पॉवर स्टेशन हो, एन एच 84 का चौड़ीकरण हो, श्री रामायण परिपथ में बक्सर का नाम शामिल होना हो, या पर्यटन के क्षेत्र में इसी रामायण परिपथ के साथ खुलने वाली असीम संभावनाएं हो, सभी के सफल क्रियान्वयन और संचालन के लिए अभी के वर्तमान सांसद बधाई के पात्र हैं।

तीर्थयात्रियों के मन मे हमारे प्रिय बक्सर की छवि

लेकिन आप का भी क्या दोष? विगत कुछ वर्षों में आप की हालत उस सास की तरह है जो अपने बहु की बनाई हुई स्वादिष्ट साग की सब्जी को इस लिए खाने के बजाय कोस रही है कि बहु ने साग में हल्दी क्यों नही डाला? मैं, एक आम नागरिक, जो जिम्मेदारी से अपना टैक्स भरते हुए अपने घर के अलावा अपने हिस्से के बक्सर, बिहार और भारत को समृद्ध एवं सशक्त बनाने हेतु लगातार कार्य कर रहा है, आग्रह करता है कि आईये मिल कर उन 26 पवित्र तीर्थ स्थानों के रास्ते को ही साफ कर दिया जाए जिस रास्ते से वो तीर्थयात्री गुजरेंगे।

उन यात्रियों के रास्ते मे कुछ फूल ही बिखेर दिए जाएं। उन यात्रियों के लिए स्वागत का कुछ अन्य प्रबन्ध भी कर लिया जाए जो सरकार ने नही किया हो। क्योंकि सरकारें आएंगी जाएंगी, सांसद, विधायक, नरकपालिका के प्रतिनिधि आएंगे जाएंगे लेकिन दो चीजें स्थाई रहेंगी- एक तो आप और हम तथा दूसरे उन तीर्थयात्रियों के मन मे हमारे प्रिय बक्सर की छवि। और इस छवि को कैसे बेहतर बनाएं इसकी जिम्मेदारी सिर्फ आपकी और हमारी है।

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