पुलिसिया ज्यादती के खिलाफ खम ठोंककर लड़ने वाली दलित महिलाओं का हुआ सम्मान

-सिसराढ़ गांव की दो दलित महिलाओं पर राजपुर पुलिस ने ढाया था जुल्म -करीब डेढ़ माह पहले मारपीट के बाद दोनों को भेज दिया गया था जेल -सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रवेष यादव ने दिलवाया दोनों महिलाओं को इंसाफ

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- राजपुर पुलिस की कथित ज्यादती का शिकार हुई दो दलित महिलाओं के जेल से बाहर आते ही स्थानीय लोगों ने सम्मान समारोह आयोजित किया. चौसा के पास आयोजित समारोह में दोनों महिलाओं और उन्हें इंसाफ दिलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रवेश यादव को सम्मानित किया गया.

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रामप्रवेश यादव ने दलित महिलाओं का साथ दिया और दोनों को इंसाफ दिलवाया

समाजिक कार्यक्रर्ता रामप्रवेश यादव ने कहा कि जब तक आखिरी सांस है, ऐसे जोर-जुल्म के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. बस आप सबों का स्नेह यूं ही बना रहे, इसी की बदौलत ऐसी लड़ाइयां जीती जाती हैं. समारोह में मौजूद जिला परिषद अध्यक्ष के प्रतिनिधि मनोज यादव ने इस लड़ाई के लिए सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रवेश यादव की खूब सराहना की. अन्य वक्ताओं ने भी कहा कि जब पुलिस से लेकर गांव के लोग मुखालिफ थे. तब सच की लड़ाई रामप्रवेश यादव ने लड़ी. दलित महिलाओं का साथ दिया और दोनों को इंसाफ दिलवाया.

इस कार्य की जितनी सराहना की जाए कम है. बता दें कि राजपुर थाने के सिसराढ़ गांव निवासी अनूप राम के खिलाफ महज एक माह में शराब के अवैध कारोबार के चार-चार मुकदमे लाद दिए गए, जबकि उसके मुताबिक उसकी कहीं से कोई संलिप्तता नहीं रही. बीते 8 जनवरी को सीआरपीएफ में बहाली के लिए फिजिकल टेस्ट का कॉल आया. इसके बाद उसके परिवार से रंजिश रखने वाले एक व्यक्ति ने उसकी जिंदगी बर्बाद करने के मकसद से पुलिस को सूचना देनी शुरू की कि अनूप शराब बेचता है. बकौल अनूप, पुलिस ने उसे थाने पर बुलाया. जब वह नहीं गया, तो तीन दिन बाद 11 जनवरी को उसके खिलाफ पहला मुकदमा दर्ज किया गया.

प्रेमा व तपेश्वरी को बुरी तरह पीट दिया था पुलिस

इसके बाद लगातार चार मुकदमे दर्ज कर दिए गए, जबकि न तो वह कभी शराब के साथ पकड़ा गया, न ही उसके घर से कभी शराब बरामद हुई. बहरहाल, बेटे के खिलाफ पुलिस का रवैया देखा अनूप के पिता पप्पू राम की 18 अप्रैल को हार्ट अटैक से मौत हो गई. बीते 8 जून की रात राजपुर पुलिस अचानक सिसराढ़ पहुंची और अनूप की मां प्रेमा कुंवर और एक अन्य महिला तपेश्वरी देवी को उठा ले गई. इस बीच गांव वालों के साथ पुलिस की धक्का-मुक्की हुई, जिसके चलते पुलिस वाले उग्र हो गए और प्रेमा व तपेश्वरी को बुरी तरह पीट दिया.

पुलिस की पिटाई से प्रेमा का सिर फट गया. पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया. तब गांव के कुछ लोगों ने अनूप के परिवार के खिलाफ साजिशें रचनी शुरू की. पिता की मौत और मां के जेल जाने के बाद अनूप असहाय हो गया. उसे सीआरपीएफ का फिजिकल टेस्ट देने जाना था, लेकिन हालात प्रतिकूल थे. कोई मददगार नहीं. ऐसे में उसने सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रवेश यादव से गुहार लगाई.

अदालत ने नाहक जेल भेजी गई दोनों महिलाओं को जमानत दे दी

यादव ने अनूप की मां और उसके साथ जेल गई महिला को इंसाफ दिलाने की कवायद शुरू की. अदालत में बहस के दौरान पुलिस द्वारा तीन दिनों तक हाजत में रखने और पिटाई करने की बात सामने आई. इसको लेकर राजपुर के थानाध्यक्ष को तलब किया गया. अदालत ने नाहक जेल भेजी गई दोनों महिलाओं को जमानत दे दी. इसे पुलिसिया ज्यादती पर इंसाफ की जीत बताते हुए चौसा में दोनों महिलाओं का सम्मान समारोह आयोजित किया गया.

समारोह में रामजी यादव, पूर्व मुखिया लालसाहब यादव, वंशीधर यादव, कमलेश यादव, अखिलेश राय, वीरप्रकाश राय, मनीश यादव, देवमुनि पासवान, राहुल यादव, रामेश्वर यादव, दिनेश राम, बरमेश्वर यादव, सुभाष यादव, मनोज यादव, डॉ. निराला राम, दुखी यादव, अजय पांडेय, दिवाकर पांडेय, लट्टू पांडेय, वीरेंद्र यादव, सोनू यादव सहित कई लोग मौजूद रहे.

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