“हर थाली मे एक बिहारी व्यंजन” के सपने को कर रहा साकार :नगर उपाध्यक्ष

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- जलवायु अनुकूल प्रजातियों, प्रौद्योगिकियों एवं कार्य प्रणालियों को जिले के प्रगतिशील किसानों के बीच पहुंचाने, कृषि जोखिम को कम करने वाले प्रजातियों को बढ़ावा , इसके प्रति जागरूकता लाने एवं इसके प्रसार हेतु कृषि विज्ञान केन्द्र बक्सर द्वारा एक दिवसीय कृषक-वैज्ञानिक समागम का आयोजन किया गया।

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कार्यक्रम की शुरूआत जलवायु परिवर्तन से कृषि पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव और इससे उत्पन्न समस्या एवं कुपोषण की चुनौतियों के समाधान हेतु भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित उच्च पोषक तत्वों से भरपूर 35 फसल किस्मों व राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर के नवनिर्मित परिसर को राष्ट्र को समर्पित करने समेत कई कृषि योजनाओं की शुरूआत करते हुए माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा माननीय प्रधान मंत्री महोदय के संबोधन तथा किसानों से सीधी बातचीत कार्यक्रम का जीवंत प्रसारण किया गया। यह कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से किया गया, जिसमें बक्सर के 200 से अधिक किसानों ने भाग लिया एवं जागरूक हुए।

जैव संपोषित प्रजातियों की वैज्ञानिक विधि से उत्पादन के तरीकों को विस्तारपूर्वक बताया।

केन्द्र द्वारा आयोजित कृषक-वैज्ञानिक समागम कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि इन्द्रप्रताप सिंह, नगर उपाध्यक्ष (नगर परिषद बक्सर), जिला कृषि पदाधिकारी बक्सर मनोज कुमार, संजय सिंह एवं केन्द्र के प्रभारी प्रमुख हरिगोबिंद ने संयुक्त रूप से द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम के अतिथियों व किसान प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए हरिगोबिंद ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित प्रभेद जिसमें चना, अरहर, सोयाबीन, धान, बाजरा, मक्का, कुटू, बाकला आदि के कुल 35 उन्नतशील पोषणयुक्त बीज विकसित किये गये है,जो बदलते जलवायु परिवर्तन से बहुत कम प्रभावित होगें तथा इनका कुपोषण को दूर करने मे महत्वपूर्ण योगदान होगा। गेहूं प्रभेद बी0एच0यू0 25 एवं 31 जैसे जैव संपोषित प्रजातियों की वैज्ञानिक विधि से उत्पादन के तरीकों को विस्तारपूर्वक बताया।add buxar santosh chaubey

उपस्थित जिला कृषि पदाधिकारी, मनोज कुमार ने प्रतिभागियों को राज्य सरकार की संबंधित सभी योजनाओं की जानकारी दी तथा इनका लाभ किसानों को लेने की बात कही। विशेषज्ञ एवं जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के केन्द्र प्रधान अन्वेषक रामकेवल ने उपस्थित सभी कृषकों को जलवायु अनुकूल लंबी अवधि के प्रक्षेत्र परीक्षण एवं प्रदर्शन इकाई मे विभिन्न उन्नति कृषि तकनीकियों को भ्रमण कराकर अपनाने पर जोर दिया। साथ ही जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने हेतु नई प्रजातियों को अपनाने की बात कही। इसके अतिरिक्त धान क्षेत्र मे लगनेवाले जीवाणु पर्णझूलसा के निदान एवं उपचार की जानकारी दी।

“हर थाली मे एक बिहारी व्यजंन”

मुख्य अतिथि इन्द्रप्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहां कि जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाकर ही अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर होकर ही “हर थाली मे एक बिहारी व्यजंन” के सपने को साकार को किया जा सकता है।

कार्यक्रम में रामोबरिया, बालापुर, चुरामनपुर, हरिकिशुनपुर, दलसागर, जगदीशपुर, हुंकहां, कुकुढ़ा, बिझौरा समेत अन्य गाँवों के किसान उपस्थित थे, जिनमें रमावती देवी, गीता देवी, अंजली कुमारी, बिपिन बिहारी पाण्डेय, प्रेमचंद कुमार, मनोज कुमार दूबे, सुमंत पासवान, रौशन कुमार सिंह, सोनापति यादव, छोटे शर्मा, लालजी यादव, पुष्पा देवी समेत 200 से ज्यादा किसान थे। केन्द्र के आरिफ परवेज,रवि चटर्जी, सरफराज अहमद खान, अरविंद कुमार, संदीप कुमार ने सहयोग किया।

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