रामराज कोई संविधान से नही प्रेम से चला करती थी- ब्रह्म स्वरूप

चित तभी स्थिर हो सकता है जब भक्ति करने में लग्न हो। जब एक बार भक्ति में लग्न लग जाय उसका जन्म जन्म के लिए भव से पार हो जाता है। आगे कहा कि रामराज कोई संविधान से नही प्रेम से चला करती थी

रामराज कोई संविधान से नही प्रेम से चला करती थी- ब्रह्म स्वरूप

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- सदर प्रखंड के हनुमत धाम मंदिर कमरपुर में मनाए जा रहे विश्व विख्यात संत नारायण दास भक्तमाली मामा जी महाराज की पुण्य स्मृति के 12वे वर्ष के दूसरे दिन रामचरितमानस की सामूहिक अखंड पाठ एवं श्री भक्तमाल जी के सस्वर गायन के साथ शुभारंभ हुआ।

दोपहर में वृंदावन धाम से पधारे श्री राम कथा के सरस एवं सुमधुर गायक अनंत श्री विभूषित ब्रह्म स्वरूप जी महाराज ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि, सत्संग समाज को जोडऩे का काम करता है। मनुष्य शरीर प्राप्त कर सत्संग कर्म लोगों को अपना कल्याण करना चाहिए। संतो का मिलना बहुत दुर्लभ है। संत वेश भूषा से नहीं आचरण से होता है। मनुष्य जीवन में सत्य को धारण करना भी सत्संग है। कहा जाय तो सन्तो का आचरण ही उपदेश है।

एक भक्ति ही मुक्ति का सही मार्ग है।

यह संसार स्वपन हैं। और स्वपन को समझाया जाय तो सोना ही होगा। इस संसार मे जब-जब जन्म हुआ हर जन्म में माँ बाप भाई बहन सब रिश्तेदार मिले पर ये कोई नही सिखाया भक्ति करो। हर जन्म में सब रिश्तेदार अपने स्वर्थ के लिए ही आते हैं। पर एक भक्ति ही मुक्ति का सही मार्ग है। और भक्ति के लिए चित को स्थिर करना होगा। चित तभी स्थिर हो सकता है जब भक्ति करने में लग्न हो। जब एक बार भक्ति में लग्न लग जाय उसका जन्म जन्म के लिए भव से पार हो जाता है। आगे कहा कि रामराज में कोई सविधान नही था, लोगो मे इतना प्रेम भक्ति था जिससे रामराज चलती थी।

राम जी के राज भक्तिमय से चलती थी जिसे ह्रदय प्रधान कहा जा सकता है पर कलयुग में सविधान कोर्ट कचहरी बुद्धि प्रधान का जा सकता है।क्योंकि हर नियम बुद्धि बिबेक से चलती है।कथा में समिति के संस्थापक एवं मामाजी महाराज के प्रथम शिष्य श्री रामचरित्र दास जी महाराज जी उपस्थित रहे।

रात्रि में भक्त नरसी मेहता लीला का हुआ मंचन:

द्वितीय दिवस की लीला में श्री मामा जी के परिवारों द्वारा भव्य मनोहर दृश्य प्रस्तुत किया गया जिनमें नरसी मेहता के जीवन काल उत्तर काल के पर प्रकाश डाला गया इसी क्रम में एक दृश्य में दिखाया गया है कि किस तरह नरसी मेहता के सहायता के लिए भगवान श्री कृष्ण (कृष्णा खाती- बढ़ाई )के रूप में आकर उनके टूटे हुए बैलगाड़ी को मरम्मत करते हैं, तथा मजदूरी के रूप में भगवान के भजन सुनाने की इच्छा प्रकट की।

लीला आगे दिखाया गया कि भगवान श्री कृष्ण नरसी मेहता की बेटी नानी बाई का मेहरा को भरने के स्वयं सांवल शाह के रुप में पधारे तथा उनके दुखों को दूर किया तथा सबको संतुष्ट किया।इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने इसी कलयुग में नरसी मेहता नामक भक्त को कुल 50 बार प्रत्यक्ष रूप से नाना अवसरो पर दर्शन दिया।

लीला में मुख्य भूमिका में श्री कृष्ण-कुश, नरसी- लालजी, रुकीमणि- दिलीप, नान्हींबाई- रामू तथा बचाजी,अनिमेष, नंद बिहारी, धनंजय, राजेश, अनीश, मनोरंजन, जयशंकर समेत लीला के पात्र में भूमिका निभाई।विनीता दीदी, रविलाल, नमोनारायण, प्रवीण, प्रिंस, नीतीश, पिंटू, सरोज कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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