एक सवाल:- कन्या पूजन सम्मान या अपमान

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हिन्दू धर्म मे कन्या यानि छोटी लड़कियों को देवी का रुप माना जाता है। एक कन्या का सम्मान करना माँ दुर्गा का पूजन करने के बराबर है।

एक सवाल:- कन्या पूजन सम्मान या अपमान

बक्सर अप टू डेट न्यूज़/विशेष लेख:-भारतवर्ष एक ऐसा देश है जहाँ कन्याओं का पूजन किया जाता है। खास कर नवरात्रि में नौ दिनों तक यह उत्सव चलता है।नवरात्रि के नवमी के दिन आखिरी व्रत होता है जिसमे नौ कन्याओं के विशेष भोज भी कराया जाता है ।हिन्दू धर्म मे कन्या यानि छोटी लड़कियों को देवी का रुप माना जाता है। एक कन्या का सम्मान करना माँ दुर्गा का पूजन करने के बराबर है।

नवरात्रि आते ही हमारे मन उमंग से भर जाता है। चारों तरफ वातावरण में धूप अगरबत्ती और फूलों की खुशबू जैसी फैल जाती है। चारों तरफ दुर्गा पंडाल नजर आते हैं। सारा वातावरण मां के भक्ति में सराबोर हो जाता है। ऐसे ही मौसम में अपने घर से कुछ काम के लिए बाजार की तरफ निकल पड़ा।कुछ ही दूरी पर माँ दुर्गा के स्वरूप में विराजमान छोटी छोटी कन्याओं का भव्य पूजन हो रहा था।

मन मे आ रहा केवल एक बिचार, कन्या सम्मान या अपमान

आकर्षक रूप से सजाया भी गया था। लोग देखते ही मान मष्तिस्क माँ की स्वरूप मोह लेती थी। बेटियों को सम्मान मिल रहा था मुझे बहुत अच्छा लगा। वह दर्शन करने के बाद में वहां से बाजार की तरफ चल पड़ा। मैंने कुछ लड़कों को देखा जो कुछ लड़कियों पर फब्तियां कस रहे थे। यह तो रोज की बातें है। पर जो बात मुझे डिस्ट्रिक्ट कर रही थी। यह थी कि सब लड़के उस मंदिर से ही आ रहे थे जहां कुछ देर पहले मैंने कुछ लड़कियों को मां दुर्गा के रूप में देखा था। मेरे मन में एक ही विचार चल रहा था यह कन्या पूजन सम्मान या अपमान।

कन्या जो लड़कियों में मां दुर्गा के रूप में थी उसमें और इन लड़कियों में कोई अंतर है मां दुर्गा के रूप में सजी लड़कियां का हम सम्मान करते हैं और सड़क पर चलते लड़कियों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। क्या यही है नवरात्रि में दुर्गा पूजा जो एक तरह माँ दुर्गा का पूजन वही दूसरी तरफ कन्याओं के साथ छेड़खानी।

कलयुगी रावण को सजा देने में प्रशासन भी कांप जाती है

यहां तक कि लगातार समाचार के माध्यम से आपभी देखे सुने और पढ़े होंगे वो बच्ची अभी ठीक से बोल भी नही पाती है और उसके साथ दरिंदो ने दुष्कर्म किया। भैया भैया चिल्लाती रही पर हवस की पुजारी ना त सुनी। क्या यही इस भारतवर्ष की कन्या पूजन।

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हम दशहरा इस लिए मनाते हैं क्योंकि इसी दिन श्री राम ने पापी रावण का वध किये थे। रावण का बस इतना कसूर था कि वह माता सीता को चोरी कर लंका लेकर चला गया था। इसके लिए हम हर साल उसका पुतला दहन करते हैं पर सोचिए जो ये दुश्मन कर रहे उसको सरकार प्रशासन सजा देने में कांप जा रही है। रावण को जलाने के बजाय हमे उस दरिंदो को चलना चाहिए जो इस तक के काम कर रहे हो।

—–अभिषेक कुमार राय

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