नारायण ने वामन अवतार लेकर मिटाये थे बलि का आतंक

नारायण ने वामन अवतार लेकर मिटाये थे बलि का आतंक

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :-बक्सर में वामन जयंती को लेकर श्रद्धालुओं का जनसैलाब बक्सर के चरित्रवन स्थित सुमेश्वर स्थान घाट के समीप स्थित भगवान् वामन मंदिर में उमड़ा. इस दौरान मंदिर मार्ग करीब दो किलोमीटर तक श्रद्धालुओं से पटा रहा. जेल परिसर में भगवान वामन द्वारा स्थापित आज भी शिव लिंग विद्यमान है. जिसे वामनेश्वर शिव के नाम से श्रद्धालु जानते हैं.वही वामन अवतार बलि की आतंक खत्म करने के लिए हुआ था |

जहां पूजा अर्चना को भाद्रपद शुक्लपक्ष द्वादशी तिथि (वामन जयंती) को यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं. उस मंदिर में बटुक वामन की मूर्ति भी स्थापित है. बटुक वामन के रूप में भगवान विष्णु का पांचवां अवतार बक्सर में हुआ था। जिसे दसावतारों में पहला शरीररधारी स्वरूप माना जाता है।

बक्सर मे हुआ था वामन भगवान का अवतार

दैत्यराज बलि के आतंक को खत्म करने के लिए श्री नारायण ने चरित्रवन स्थित आश्रम में ब्राह्मण दंपति के कोख से जन्म लिए। इसके बाद इस जगह का नाम वामनाश्रम पड़ गया। कद-काठी में ठिगना होने के चलते ब्राह्मण बालक का नाम वामन पड़ा। जिन्होंने अपने बुद्धि कौशल के बूते असुरराज बलि को साम्राज्य विहीन कर देवराज इंद्र के गद्दी खो की आशंका को निर्मूल कर दिया।

पूज्य नेहनिधि नारायण भक्तमाली मामा जी के प्रथम कृपापात्र श्री रामचरित्र दास महात्मा जी महाराज ने श्रद्धालुओं को बावन भगवान की कथा सुनाई।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि दैत्यराज हिरण्यकश्यप के कुल में जन्मे बलि ने देवताओं को पराजित कर तीनों लोकों पर आधिपत्य जमा लिया था। जिसके बाद दैत्यों का अत्याचार बढऩे लगा। नतीजा यह हुआ कि तीनों लोकों में असत्य व दुराचार का बोलबाला बढ़ गया।

पूज्य श्री रामचरित्र दास जी महाराज बक्सर वाले
पूज्य श्री रामचरित्र दास जी महाराज

ऋषि, ब्राह्मण, गौ व महिलाओं पर अत्याचार बढ़ गया था। देवताओं में हाहाकार मच गया। तत्पश्चात भक्तों के शोक को हरने के लिये ब्रह्मा जी के निवेदन पर श्री विष्णु ने वामन के रूप में पृथ्वी पर जन्म लेकर धर्म की स्थापना किया। श्री वामन पुराण के अलावा श्रीमछ्वागवत महापुराण, भविष्यत पुराण व बाल्मिकी रामायण आदि ग्रंथों में मिले प्रमाणों के अनुसार ब्राह्मण दंपति कश्यप व अदिति के पुत्र रूप में बटुक वामन का अवतार हुआ.

इसके बाद उनके पास सभी देवता पधारे और उनका उपनयन संस्कार कराए. वामनावतार में उन्होंने अत्याचार का खात्मा करने के लिए अहिंसक मार्ग अपनाया. वही कथा विश्राम के बाद कथा आयोजकों के द्वारा भव्य आरती की गई।

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