स्वास्थ्य उपकेंद्र वर्षों से स्वयं ही अस्वस्थ, इसे इलाज की जरूरत

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /चौसा :- निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले भी अपने कमाई का अधिकांश हिस्सा पढ़ाई एवं दवाई पर व्यय करना चाहते हैं। इससे पढ़ाई पर व्यय से दशा एवं दिशा दोनों सुधारा जा सकता है, वहीं दवाई पर व्यय से स्वस्थ एवं निरोगी रहा जा सकता है। student lone buxar

उच्च वर्ग आय वाले पढ़ाई एवं दवाई हेतु निजी क्षेत्र को प्राथमिकता देते हैं। वहीं निम्न एवं मध्यम आय वर्ग वाले चाहकर भी निजी क्षेत्र में नहीं जा पाते हैं।उनकी पूरी निर्भरता सरकारी स्कूलों एवं अस्पतालों पर होती हैं। सरकार द्वारा इस सुविधा हेतु प्रयास भी करती है। लेकिन कहीं कहीं सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही एवं कहीं कहीं सरकार की इच्छा की कमी के कारण दोनों सुविधाएं का लाभ आर्थिक रुप से विपन्न लोगों को नहीं मिल पा रहा हैं।

जब संवाददाता द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं का जमीनी स्तर पर सच्चाई जानने हेतु निरिक्षण किया गया तो पवनी स्वास्थ्य उप केंद्र पर स्थिति चुप रहने वाली ही मिला।कभी रोगियों को स्वस्थ्य करने वाला पवनी स्वास्थ्य उपकेंद्र वर्षों से स्वयं ही अस्वस्थ है ।संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य विभाग का लापरवाही से वर्षों से पवनी स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद है।‌

चौसा प्रखण्ड के ग्राम पंचायत पवनी में स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र से संबंधित अन्य जानकारी स्थानीय निवासी रामजीत गोंड ने दी। रामजीत गोंड ने बताया कि पवनी पंचायत में इस उप केंद्र को वर्ष 1980 में स्थापित किया गया था। इस स्वास्थ्य उपकेंद्र पर ग्राम पवनी के अलावे महुआरी, चुन्नी, मिल्की, गुरौना, सोवांबांध, नावांगाव, काशीपुर सहितअन्य गाँवों के रोगी अपना इलाज कराते थे । शुरुआत में चिकित्सक भी यहां आ कर उपचार करते थे। जांचोपरांत रोगियों को आवश्यकतानुसार औषधि भी दी जाती थी।

भवन खंडहर तथा शौचालय बेकार हो चुके हैं।

इससे संबंधित गांव के रोगियों को इलाज कराने के लिए शहर नहीं जाना पड़ता था ।गाँव के लोग अपना बेहतर जिन्दगी जी रहे थे। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के लापरवाही कहां जाए या सरकार की उपेक्षा कहा जाए कि पवनी उप केंद्र चवन्नी की भी सहयोग की आश लगाए हुए है। इसका एक हिस्सा तो एकदम बेकार हो गया है। भवन खंडहर तथा शौचालय बेकार हो चुके हैं।इस स्थिति में मरीज बिस्तर एवं अन्य उपकरणों की स्थिति की कल्पना ही की जा सकती हैं। कारण जो भी हो इससे ग्रामीण जनता को अब कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही हैं। ऐसी स्थिति में गाँव के रोगियों को बहुत ही समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं।

उन्हें उपचार हेतु बक्सर सदर अस्पताल जाना पड़ता हैं। जिससे बड़ी संख्या में रोगियों का जुटान हो जा रहा हैं। वर्तमान में वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण फैलने की आशंका भी बना रहता ‌है । कुछ स्थानीय निवासियों ने दुःख प्रकट करते हुए कहा कि जब स्वास्थ्य उपकेंद्र प्रारंभ किया गया था,तो इसके खंडहर बनने तक सरकार चुप क्यों हो ग‌ई?इसे बंद हुए लगभग दस वर्ष हो चुका है। सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं हेतु अनेक योजनाएं चलाई जा रही है। लेकिन जो स्थाई योजना है, उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। @वीरेंद्र पाण्डेय की रिपोर्ट

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