नववर्ष मंगलमय हो, सुनते ही हो गए आश्चर्यचकित

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सुबह मैंने कुछ लोगों से कहा की नववर्ष मंगलमय हो । उसमें से कुछ लोगों ने मुझे आश्चर्य भरी निगाहों से देखा। शायद उन्होंने सोचा कि नया वर्ष? अभी नया वर्ष?

नववर्ष मंगलमय हो, सुनते ही हो गए आश्चर्यचकित

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /ए० एन० चंचल:- आज सुबह मैंने कुछ लोगों से कहा की नववर्ष मंगलमय हो। उसमें से कुछ लोगों ने मुझे आश्चर्य भरी निगाहों से देखा। शायद उन्होंने सोचा कि नया वर्ष? अभी नया वर्ष? जबकि कुछ ने मेरी बातों को समझा। गलती उनकी नहीं है जिन्होंने नहीं समझा बल्कि उनको इस नव वर्ष की जानकारी नहीं है। क्योंकि वे तो 1 जनवरी को नया वर्ष मनाते हैं और उसकी बाज़ारों में धूम रहती है।

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अपितु पूरी दुनिया में नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है, परंतु भारतीय कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होता है। इसे नव संवत्सर भी कहते हैं।आज से भारतीय नव वर्ष प्रारंभ हो रहा है। हम विक्रमी संवत 2077 में प्रवेश कर रहे हैं। भारतीय नववर्ष का पहला दिन यानी सृष्टि का आरंभ दिवस, युगाब्द और विक्रम संवत जैसे प्राचीन संवत का प्रथम दिन, श्री राम और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक दिवस, मां दुर्गा की साधना चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस, आर्य समाज का स्थापना दिवस।

पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था

ब्रह्मपुराण के अनुसार पितामह ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि निर्माण प्रारंभ किया था। इसलिए यह सृष्टि का प्रथम दिन है। भारतीय कालगणना में सर्वाधिक महत्व विक्रम संवत पंचांग को दिया जाता है। सनातन धर्मावलंबियों के समस्त कार्यक्रम जैसे-विवाह, नामकरण, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्य विक्रम संवत के अनुसार ही होते हैं।

विक्रम संवत का आरंभ 57 ईसा पूर्व में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नाम पर हुआ है। भारतीय इतिहास में विक्रमादित्य को न्यायप्रिय और लोकप्रिय राजा के रूप में जाना जाता है। विक्रमादित्य के शासन के पूर्व उज्जैन पर शकों का शासन हुआ करता था। वे लोग अत्यंत क्रूर थे और प्रजा को कष्ट दिया करते थे।

विक्रमादित्य ने उज्जैन को शकों के कठोर शासन से मुक्ति दिलाई और प्रजा को भयमुक्त कर दिया। अस्पष्टता विक्रमादित्य के विजयी होने की स्मृति में आज से 2077 वर्ष पूर्व विक्रम संवत पंचांग का निर्माण किया गया।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने चैत्र मास को मधु मास कहा-

श्री रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने चैत्र मास को मधु मास कहा है। मधु मास अर्थात आनंद बांटती वसंत का मास। यह वसंत आ तो जाता है फाल्गुन में ही, पर पूरी तरह से व्यक्त होता है चैत्र में। सारी वनस्पति और सृष्टि प्रस्फुटित होती है, पके मीठे अन्न के दानों में, आम की मन को लुभाती खुशबू में तथा वसंतदूत कोयल की गूंजती स्वर लहरी में।

चारों ओर पकी फसल का दर्शन, आत्मबल और उत्साह को जन्म देता है। खेतों में हलचल, फसलों की कटाई , हंसिए का मंगलमय खर-खर करता स्वर और खेतों में डांट-डपट-मजाक करती आवाजें। जरा दृष्टि फैलाइए, भारत के आभा मंडल के चारों ओर। चैत्र क्या आया मानों खेतों में हंसी-खुशी की रौनक छा गई।

नई फसल घर में आने का समय भी यही है। इस समय प्रकृति में उष्णता बढने लगती है, जिससे पेड़ -पौधे, जीव-जन्तु में नव जीवन आ जाता है। लोग इतने मदमस्त हो जाते है कि आनंद में मंगलमय  गीत गुनगुनाने लगते है। चैत शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के दिन सूर्योदय के समय जो वार होता है। वह ही वर्ष में संवत्सर का राजा कहा जाता है, मेषार्क प्रवेश के दिन जो वार होता है, वही संवत्सर का मंत्री होता है इस दिन सूर्य मेष राशि में होता है।

अपने नववर्ष को पहचानें, उसका स्वागत करें

यह विडम्बना ही है कि हमारे समाज में जितनी धूम-धाम से विदेशी नववर्ष एक जनवरी का उत्सव नगरों – महानगरों में मनाया जाता है। उसका शतांश हर्ष भी इस पावन-पर्व पर दिखाई नहीं देता। बहुत से लोग तो इस पर्व के महत्व से भी अनभिज्ञ हैं।

आश्चर्य की बात यह है कि हम परायी परंपराओं के अन्धानुकरण में तो रुचि लेते हैं, किन्तु अपनी विरासत से अनजान हैं। हम अपने पंचांग की तिथियाँ, नक्षत्र, पक्ष, संवत् आदि से प्रायः विस्मृत हो रहे हैं।यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे बदलना होगा। आइये, अपने नववर्ष को पहचानें, उसका स्वागत करें और परस्पर बधाई देकर इस उत्सव को सार्थक बनाये।

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ परिवार के तरफ से आपको और आपके परिवार को नववर्ष मंगलमय हो

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