बाढ़ मछुवारों के लिए हो रहा है बरदान साबित, वैश्विक महामारी में घर बैठे मिला रोजगार

मछली पकड़ने के लिए नदी नालों में लगाया जाल,विभिन्न किस्म की आयी मछलियां

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ |चौसा :- जिला में गंगा व कर्मनाशा नदी के लगातार घट रहे जलस्तर से एक तरफ मछुआरों के चेहरे खिले हुए हैं, लेकिन किसानों की बड़ी आबादी मायूस और हताश है।नदियों व नालों की अधिकता वाले चौसा प्रखण्ड में बाढ़ अभिशाप ही नहीं वरदान भी सिद्ध हो रही है। यही सब है कि यहां के मछुआरे बाढ़ आने की प्रतीक्षा करते हैं।

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बाढ़ अपने साथ विभिन्न किस्मों की मछलिया भी लाती है। अत: उसके आते ही यहां की नदियां व नाले मछलियों से भर जाती हैं।जिसके कारण इस वैश्विक महामारी में देश के विभिन्न शहरों में काम करने वाले घर पर बेरोजगार बैठे मछुआरों को आय का मुख्य आधार मिल गया है। प्रखण्ड में मुख्य रूप से कर्मनाशा और गंगा की बाढ़ में इनसे जुड़ी नदियों व नालों में मछलियां आती हैं। जिस वर्ष यहां बाढ़ नहीं आता है उस वर्ष यहां मछलियों की तादाद कम होती है। बता दे कि कर्मनाशा नदी व सहायक नालों से पानी।तेजी से घट गया है।जिसको ले पहले से ही पानी निकलने के रास्ते मे जाल फंसा दिया गया था।

दर्जनो मछुआरे की भीड़ देखी जा रही हैं

वहीं जिसके समीप वाले चौसा- मोहनिया स्टेट हाइवे स्थित छोटे पुल के पास सुबह के 7 बजे से शाम के सात बजे तक करीब दर्जनो मछुआरे की भीड़ देखी जा रही हैं। सभी मछुआरे पुल के नीचे जाल फेंक रहे हैं। राहगीर भी जाल में मछली फंसने का लुत्फ उठा रहे हैं।जिन्हें सीओ द्वारा उस रास्ते से गुजरते वक्त लोगों को वंहा से खदेड़ा गया।एवं पानी के पास न खड़े रहने की हिदायत दी गयी।उसके बावजूद मछली खरीदने के लिए पुल के पास ग्राहकों की भीड़ जुटी देखी गयी।

150-200 रुपये किलो की दर से मछलियां बिक रही हैं।यंही कारण है कि बाढ़ आने से मछुआरों के चेहरे खिले हुए हैं, लेकिन तटवर्तीय किसानों की बड़ी आबादी मायूस और हताश है।क्यो की बाढ़ ने सबसे ज्यादा किसानों के उम्मीद पर पानी फिरा है।हलांकि कृषि विभाग द्वारा कहा गया कि किसानों की क्षति का आकलन कर रही है किसानों के नुकसान का मुवावजा भी दिया जायेगा।

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