आजादी के बाद भी सड़क का निर्माण नहीं, कंधे पर जाते हैं दूल्हे राजा

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /चौगाईं /रजनीश कुमार:- प्रखंड क्षेत्र के एक ऐसा गांव है जहाँ आजादी के 73 वर्ष बाद भी गांव में जाने की पक्की सड़क नहीं है।शादी विवाह के दौरान हल्की बारिश पड़ गई तो यहां के दूल्हा दुल्हन को कंधे पर बैठाकर गांव के लोग विदा करते है।

नचाप पंचायत के पुरैना गांव में जाने के लिए मुख्य सड़क नहीं है। सड़क सुविधा नहीं होने के कारण लोग 5 किमी पैदल चलने को मजबूर हैं। लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे। लेकिन ग्रामीणों को गांव के मुख्य सड़क का निर्माण नहीं हुआ। हल्की बारिश होने के बाद कच्ची रास्ते से गाड़ी का आवागमन बंद हो जाता है।

सड़क मार्ग पर किसी का ध्यान नहीं

ग्रामीण पिछले वर्षों से लगातार गांव को सड़क से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। लेकिन आज तक न तो प्रखंड स्तरीय अधिकारी और न ही जिलाधिकारी इस गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने में कोई रूचि देखये। गुरुवार को एक वीडियो भी इसी गांव से वायरल किया जा रहा है। जिसमें साफ दिख रहा है कि रास्ते पर कीचड़ हो जाने से गांव के एक व्यक्ति दूल्हे राजा को कंधे पर बैठाकर परछावन के लिए ले जा रहा है। परन्तु पंचायत राज्य सरकार की ओर से इस सड़क मार्ग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

ग्रामीणों रामशंकर यादव, श्री गणेश यादव, सरदार यादव, मनरिका यादव,नथु यादव, मुकेश कुमार, रमेश कुमार,मोरा यादव, सुखदेव यादव,भिम यादव, जनार्दन यादव में बताया कि वर्तमान समय में बस्ती की आबादी एक हजार के आसपास है। बीमारी की हालत में एंबुलेंस बुलाने पर कच्ची सड़क होने के कारण गांव में नहीं पहुंच पाती। जिससे हमलोग मरीज को चार पाई के सहारे इलाज के लिए लेकर जाते है। शादी-विवाह आदि मांगलिक कार्यों के समय गांव के बाहर ही गाड़ी खड़ी होती है। वहीं से बरात भी जाती है और बरात आने पर भी दुल्हा दुल्हन को पैदल उतरकर आना-जाना पड़ता है। ग्रामीणों को गांव की किसी कच्ची सड़क से गुजरना होता है। बाकी मौसम में तो लोग किसी प्रकार से निस्तार कर लेते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में इस कच्चे रास्ते से निकलना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन होता है।

अनुमंडल क्षेत्र के कई ऐसे गांव हैं, जहां आजादी के 73 वर्ष बाद भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं

कारण की 3 किलोमीटर तक कच्चे रास्ते में जगह-जगह पानी कीचड़ ,गड्ढे से चलना आसान नहीं रहता। पुरानी बस्ती के बिन बारिश के मौसम में तो लोग आवागमन कर लेते है। परंतु झिशी भी पड़ जाये तो गांव में आना नामुमकिन हो जाता है। कई वर्षो से लोगों की मांग सड़क सुधार को लेकर रही है। पर ग्रामीणों की तकलीफों से मानो प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को कोई सरोकार ही ना हो।

राजद के डुमरांव विधानसभा के पूर्व प्रत्यासी हरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बद्री सिंह ने बताया कि उस गांव में जाने के लिए रास्ते नहीं हैं इसको लेकर कोई जगह आवाज उठाया गया लेकिन कोई भी अधिकारी व जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह पुराना गांव ही नहीं अनुमंडल क्षेत्र के कई ऐसे गांव हैं, जहां आजादी के 73 वर्ष बाद भी पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। हम इस सड़क निर्माण के लिए सरकार के पास लिखित गुहार लगाएंगे। ताकि यहां के लोगों को पक्की सड़क का निर्माण हो सके।

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