विद्यार्थियों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ मानस की शिक्षा जरूरी

वृंदावन धाम से पधारे संत श्री अनंत विभूषित ब्रह्म स्वरूप जी महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि विद्यार्थियों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ मानस की शिक्षा जरूरी, तभी अपराध खत्म किया जा सकता है |

विद्यार्थियों में किताबी ज्ञान के साथ-साथ मानस की शिक्षा जरूरी

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :-सदगुरुदेव पुण्य स्मृति महोत्सव श्री हनुमत धाम कमरपुर में चल रहे कार्यक्रम के चौथे दिन वृंदावन धाम से पधारे संत श्री अनंत विभूषित ब्रह्म स्वरूप जी महाराज ने कथा सुनाते हुए कहा कि धर्म को जानने वाला ही प्रेम कर सकता है अधर्मी कभी प्रेम कर ही नहीं सकता और जो धर्म के साथ रहता है भगवान भी उसी के साथ रहते हैं। आगे कहा कि जिस कार्य से भगवान श्री राम प्रसन्न हो जाए वही कार्य धर्म होता है चाहे उस कार्य से दुनिया के लोग आपके साथ रहे या दुखी हो।

स्कूलों में राम चरित्र मानस,रामायण, गीता आदि ग्रंथों की पढ़ाई होने से ही अपराध खत्म हो सकते हैं। क्योंकि ये ग्रंथ हमेशा सिखाती है भाई-भाई का प्यार, प्रेम, व्यवहार, जीने का ढंग। साथ ही यही कहा कि राम जी का प्रेम पूर्ण चंद्रमा की भांति होती है जब एक बार प्रेम भगवान से हो जाती है वह प्रेम कभी घट नहीं सकता।जो दुनिया प्रेम करती है वह कष्टमय होता है पर यही दुनिया वाले भगवान से प्रेम कर ले वह सदा सदा के लिए भव से पार हो जाता है।

‘भइले मिथिला में शोर, आज सिया लाडली के छैन मटकोड़’

मंगलवार को सियाजी की महिलाओं ने हल्दी व मटकोड़ की रस्म निभाई। मटकोड़ के दौरान मिथिलांचल की मैथली भाषा में महिलाओं ने ‘भइले मिथिला में शोर, आज सिया लाडली के छैन मटकोड़, आनंद सगुन सुहावन हरदी लगावन हे, तथा हरदिया बड़ी पातर हे. आदि गीतों को गाकर लोगों को भाव-विभोर कर दिया। इस दौरान हल्दी गीतों को गाती हुई महिलाएं कुदाल से माटी की कुड़ाई की।वही सियाजी के हल्दी मटकोड के बाद श्रीराम समेत चारो भाइयों का बारात की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। जिसके दर्शन को ग्रामीणवासी सड़क के किनारे उमड़ पड़े। जिसके साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से साधु-संत व श्रद्धालु पहुंचे थे।

कमरपुर बना जनकपुर, पहुंची श्रीराम की बारात

श्रीराम बारात के इस अद्भुत नजारे की एक झलक पाने को बच्चे, बूढ़े या युवा दोनों तरफ सड़कों के किनारे पलक पांवड़े बिछाए उनकी राह निहार रहे थे। रामजी की बारात जी गली मोहल्ले में जाती, उस गली के लोगो दूल्हा समेत बरातियों जमकर स्वागत करते हैं। घरों के आगे सड़कों पर रंगोली बनाते बनाकर बरात के गुजरने के दौरान गाँववासी के प्रत्येक घर से पुष्प की वर्षा भी होती रही।पूरे बरात के साक्षी अवध हम से पधारे संत श्री नारायण दास जी महाराज, समिति के संस्थापक श्री राम चरित्र दास महात्मा जी महाराज, वृंदावन धाम से पधारे संत कथा व्यास ब्रह्म स्वरूप जी महाराज रहे।

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लीला में सीताजी-मनु, राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न भूमिका में रहे।कार्यक्रम में कुंदन पांडेय, उमा, मनोहर, रविलाल, नमोनारायण, मनीष, प्रिंस, सतीश, नीतीश, अनीश, मनोरंजन, रामकृपाल, श्याम, श्याम प्रकाश, हिटलर, प्रियांशु, नंद बिहारी, पिंटू, रागिनी, स्तुति, जयशंकर तिवारी,बच्चाजी,रामू, दिलीप सालिनी, विनीता दीदी, समेत महाराज जी के परिकर वीरेन्द्र उपस्थित रहे।

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