पर्यावरण के क्षति के कारण उत्पन्न हो रही है बीमारियां : एसडीओ

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रीय सहारा के 15 वें स्थापना दिवस के अवसर पर नगर के ब्लाक रोड स्थित श्रद्धा आश्रम चौरिटेबल ट्रस्ट सह कौशल विकास केंद्र के मुख्य हाल परिसर में बुधवार को पर्यावरण एवं कोरोना महामारी विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया ।

new abloom services buxar
विज्ञापन

परिचर्चा को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि सदर अनुमंडलाधिकारी केके उपाध्याय ने कहा आज पर्यावरण संरक्षण के काफी जोर-शोर से आवश्यकता है, क्योंकि पर्यावरण के क्षति के कारण ही आज बहुत सारी बीमारियां उत्पन्न हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि आज स्थिति ऐसी बन गई है, कि हर आदमी को अपने लिए ऑक्सीजन उत्पन्न करना आवश्यक हो चुका है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को एक वृक्ष लगाना जरूरी है। श्री उपाध्याय ने आगे कहा कि कोरोना काल में राष्ट्रीय सहारा ने अपने वर्षगांठ के अवसर पर पर्यावरण को संरक्षित करने का जो संदेश दिया है, वह सराहनीय है। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को एक वृक्ष लगाना जरूरी है।

कोरोना महामारी से सीख लेते हुए हर व्यक्ति को कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए

कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिवक्ता अनिल कुमार त्रिवेदी ने की, जबकि संचालन साहित्यकार डॉ अरुण मोहन भारवि ने किया इसके पूर्व मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा विधिवत दीप प्रज्वलित कर परिचर्चा का शुभारंभ किया गया। तदोपरांत पर्यावरण एवं कोरोना महामारी विषय पर परिचर्चा का विषय प्रवेश राष्ट्रीय सहारा बक्सर के ब्यूरो चीफ जितेंद्र कुमार मिश्र ने किया ।

तदोपरांत इसके बाद विशिष्ट अतिथियों में जिलाधिकारी के ओएसडी देवेंद्र प्रताप शाही ने कहा कि पर्यावरण संरक्षित नहीं करने का नतीजा ही है, कि आज ऑक्सीजन की कमी हो रही है । उन्होंने वृक्ष लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया और वहीं राष्ट्रीय सहारा ने वर्षगांठ पर वृक्ष लगाकर लोगों को संदेश दिया कि वृक्ष लगाना जीवन के लिए कितना आवश्यक है, खासकर इस परिवेश में जब कोरोना महामारी से लोग जूझ रहे है।

ऐसे में पर्यावरण संरक्षण का बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। तत्पश्चात सदर बीडियो दीप चंद्र जोशी ने पर्यावरण संरक्षण के बहुआयामी प्रकारों पर सविस्तार चर्चा की तथा कोरोना महामारी से बचने के लिए “2 गज दूरी मास्क है जरूरी” पर जोर दिया। अन्य वक्ताओं में रेड क्रॉस चेयरमैन डॉ एके सिंह ने पर्यावरण एवं कोरोना महामारी परिचर्चा में भाग लेते हुए कहा कि पर्यावरण को संरक्षित करके हम सभी ऐसे विकराल महामारी पर काबू पा सकते है।

वन्दे वानिम नया बजार buxar
विज्ञापन

पत्रकार ललित बिहारी मिश्र सुहाग ने किया आगत अतिथियों का धन्यवाद

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अधिवक्ता अनिल कुमार त्रिवेदी ने कहा कि आज कोरोना महामारी के आने व इससे पीड़ित होने में हमारी भी लापरवाही है। इसका मुख्य कारण वृक्षों का संरक्षण नहीं करना है। अगर वृक्ष होंगे तो ऑक्सीजन का अधिक से अधिक उत्सर्जन होगा और वातावरण शुद्ध होगा। इसलिए लोगों को ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय सहारा अखबार से जुड़े पत्रकार ललित बिहारी मिश्र सुहाग ने आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन तथा आभार व्यक्त किया।

“मरलो प छोड़ी नाउ त भाग के का होई,

“मान ल कि रोग कोरोना सचमुच बाटे बाड़ा, सीना तान के ओकरा आगा हो जाए के बा खाड़ा” कविता जैसे ही प्रेमातुर जी ने आगाज किया। तालियों की गड़गड़ाहट से सारा हॉल गूंज उठा वाह-वाह के बोल उपस्थित लोगों के लबों से अनायास ही निकलने लगे। मौका था दैनिक समाचार पत्र राष्ट्रीय सहारा के 15 वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह का और साहित्यकार वरिष्ठ कवि थे,

जिले के चर्चित कवि धनु लाल प्रेमातुर जी समारोह बुधवार को स्थानीय ब्लाक रोड स्थित कौशल विकास केंद्र का मुख्य हाल में आयोजित था। श्री प्रेमातुर जी कोरोना महामारी पर्यावरण विषय पर कविता सुना रहे थे। उन्होंने आगे सुनाया “मरलो प छोड़ी नाउ त भाग के का होई, अन्हरा के आगे जे रोई आपन दीदा खोई । “

“ए धनिया बरिसल ना सावनवा,

डॉ ओम प्रकाश केसरी पवननंदन ने अपनी रचना पर्यावरण पर सुनाया। ‘पर्यावरण की होगी सुरक्षा जीवन तभी बचेगा वर्तमान खुशहाल होगा तो भविष्य सवरेगा” सुनाकर बहुत तालियां बटोरी तथा वाहवाही लूटी। तदोपरांत ललित बिहारी मिश्र “सुहाग” ने अपना किसान का दर्द गीत सुनाया। जिसमें खेती करने में किसान को परेशानी होती है। सुनाकर उपस्थित सुधी श्रोताओं को भावविभोर व मंत्रमुग्ध कर दिया। “ए धनिया बरिसल ना सावनवा, कैसे होई धनवा ना, खेतवा जोतनी हेंगा दिहनी कहनी आरि कोनवा… सुनते ही श्रोता काफी आनंदित हुए।

वही कौशल विकास केंद्र की महिला कर्मचारी के द्वारा “ मैं कथा सुनाती पावन कर्मचारी के अयोध्याधाम की, प्रभु श्री राम की ” सुनाकर समारोह में चार चांद लगा दिया। इसके अलावे अन्य साहित्यकारों ने भी अपनी ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं की काफी वाहवाही लूटी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button