38 जड़ी बूटियों से सुसज्जित होगा चौसा का च्यवनमुनि आश्रम

मनरेगा से पौराणिक व ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन की दृष्टि कोण से किया जा रहा है विकसित

बक्सर अप टू डेट न्यूज़|चौसा :- वर्षो से उपेक्षित पवनी पंचायत स्थित पौराणिक स्थल महर्षि च्यवनमुनि आश्रम को सजाने व सवारने का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। हालांकि बाढ़ के कारण फिलहाल काम को बीच मे ही बन्द कर दिया गया है।बता दे कि चौसा की पहचान ऐतिहासिक व धर्मिक दोनों रूप में है।

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26 जून 1539 ई में चौसा में सेना के साथ पड़ाव डाले मुंगल शासक हुमायूं पर शेरशाह शुरी द्वारा आक्रमण कर दिया गया।जिसमें हुमायूं को उस समय मुह की खानी पड़ी थी।वंही धार्मिक रूप में बताया जाता है की महर्षि च्यवन ऋषि जिन्होने जड़ी-बुटियों से ‘च्यवनप्राश’ नामक एक औषधि बनाकर उसका सेवन किया तथा अपनी वृद्धावस्था से पुनः युवा बन गए थे। महाभारत के अनुसार, उनमें इतनी शक्ति थी कि वे इंद्र के वज्र को भी पीछे धकेल सकते थे। वे अत्यन्त तपस्वी थे।

जिनके नाम पर ही चौसा गांव का नामकरण किया गया है।जिनका आश्रम चौसा महदेवा घाट स्थित था। हालांकि चौसा को नगर पंचायत बनाने को ले अधिकारियों द्वारा ऑफिस में ही बैठ इसका गलत परसीमन तैयार कर दिया गया।जिसके कारण यह आश्रम कट कर पवनी पंचायत में चला गया है। जो वर्षों से उपेक्षित था लेकिन नमामि गंगे के बाद मनरेगा से इस घाट व आश्रम स्थली को सवारने का कार्य किया जायेगा।

इस कार्य से ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

पवनी पंचायत की मुखिया गिरिजा देवी ने बताया कि मनरेगा से घाट के पास पार्क, पेवर ब्लाक ,लाइटिग, घाट व आश्रम के पास बैठने की व्यवस्था, पौधरोपण के अलावा च्यवनप्राश से सम्बंधित जड़ी बूटियों के भी पेड़ पौधे इस आश्रम का आकर्षण का केंद्र बनेंगे।स्थानीय जन सहयोग से महर्षि मुनि की प्रतिमा भी स्थापित की जा सकती है। वहीं, इस कार्य से ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।

बता दे कि इस आश्रम के साथ महदेवा घाट का भी काफी महत्व होता है धार्मिक अनुष्ठान या हिन्दू तीज त्योहारों में आसपास एवं दूर दराज के लोग यंहा पहुंच कर स्नान ध्यान कर जल भरी भी करते है।क्यो की इस घाट पर स्नान करने का अपना एक अलग ही महत्व है।इसी घाट से देश की पवित्र नदी गंगा कल कल करती उत्तर दिशा की तरफ घूम जाती है।और धार्मिक दृष्टिकोण से उत्तरायणी गंगा में स्नान करने का उत्तम महत्व माना जाता है।

मनरेगा पीओ अजय सहाय ने बताया कि चौसा एवं इसके आसपास की जगहों को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।चौसा ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल है।जिसको ले ऐतिहासिक व पौराणिक दोनों स्थलों को सजाने व सवारने का कार्य किया जा रहा है। च्यवनमुनि आश्रम का कार्य बाढ़ के कारण रुका हुआ है।बाढ़ समाप्त होते ही कार्य प्रारम्भ कर दिया जायेगा।

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