चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने आरंभ की थी सृष्टि की रचना

चैत्र शुक्ल एकम हिन्दू नववर्ष का प्रथम दिवस है,जो 13 अप्रैल 2021 यानि आज से प्रारंभ हो रहा है।

हिन्दू नववर्ष के दिन ही ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना तथा संवत्सरों का शुभारंभ, नवरात्र का प्रथम दिवस,प्रभु राम चंद्र जी का राज्याभिषेक दिवस सहित अन्य दिवस भी है।

student lone buxarचैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही ब्रह्मा जी ने आरंभ की थी सृष्टि की रचना

बक्सर अप टू डेट न्यूज़ /चौसा(वीरेंद्र पाण्डेय) :- चैत्र शुक्ल एकम हिन्दू नववर्ष का प्रथम दिवस है,जो 13 अप्रैल 2021 यानि आज से प्रारंभ हो रहा है। अपना देश भारत देव भूमी है। यहां के निवासी हम हिन्दू अपनी अति प्राचीन व उदात संस्कृति तथा उन्नत जीवन रचना के कारण विश्व गुरु कहलाते हैं। विश्व के समस्त देश एवं उनकी संस्कृतियां नष्ट हो गई,तो भी भारत के ॠषि हमारी संस्कृति को बचाने में समर्थ हुए।

विष्णु पुराण में अपने देश भारत की सीमा निम्नलिखित श्लोक में मिलती है-“उतरं यत् समुद्रस्य,हिमाद्रेश्चैव दक्षिणं।वर्षं भारतं नाम,भारती:तत्र सन्तति:।”अर्थात जो भूखंड समुद्र के उतर एवं हिमालय के दक्षिण हो, उसका नाम भारत है तथा भारती वहां की संतान हैं। आज से 5000 वर्ष पूर्व अर्थात महाभारत के काल में यह सीमा और भी विस्तृत थी। हिमालय से सिंधु तक फैली भारत भूमि को अपनी पितृ भूमि, मातृभूमि माने उन्हें”हिन्दू”नाम से जाना जाता है।“आसिन्धो सिन्धु पर्यन्ता,यस्य भारत भूमिका। पितृभू: पुण्य भूश्चैव,सबै हिन्दू रिति स्मृत:।।” हमारा इतिहास अत्यंत प्राचीन के साथ अनादि भी है।

सृष्टि के प्रारंभ से जो लगभग 1 अरब 97 करोड़ वर्ष से अधिक है, तभी से हम है। भारतीय काल गणना का वैज्ञानिक एवं वैश्विक स्वरुप भी है। हिन्दू समाज ने परतंत्रता को कभी भी मान्यता नहीं दी है। हमारे इस लम्बे इतिहास में समय- समय पर बाह्य आक्रमण होते रहे हैं और हमें गत 1200 वर्षों तक परकीय दासता भी स्वीकार करनी पड़ी,पर हमने कभी पराजय स्वीकार नहीं किया।परकीय दासता में हमारी संस्कृति विरासत को नष्ट तथा विकृत करने का भरपूर प्रयास किया गया। अंग्रेजी राज्य में हमारे इतिहास एवं संस्कृति के विषय में योजना पूर्वक हीन भाव निर्माण का यत्न हुआ।

दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस प्रयास को रोकने के बदले और भी अधिक विकृत किया जा रहा है।

दुर्भाग्य है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद इस प्रयास को रोकने के बदले और भी अधिक विकृत किया जा रहा है। परिणामस्वरूप कुछ दिग्भ्रमित हिन्दू अपने उपयोगी प्रतीक, रीतियां तथा श्रद्धा केन्द्र को उपहास की दृष्टि से देख रहा है। यही कारण है कि भारत माता को भूमंडल में प्रतिष्ठित करने वाला हिन्दू युवा चौराहे पर खड़ा उस युवक की तरह हो गया है कि उसे समझ नहीं आ रहा है कि किधर जाएं।वह अंग्रेजी नववर्ष तो मना रहा है, लेकिन हिन्दू नववर्ष उसे याद नहीं आ रहा है।

वामपंथी इतिहासकारों द्वारा गलत शिक्षा एवं जानकारी के कारण अपनी गौरवशाली संस्कृति का ज्ञान नहीं हो रहा है।वह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को नववर्ष मनाता है। नववर्ष का पहला दिन नयापन लेकर आना चाहिए, लेकिन उस अंग्रेजी नववर्ष में नयापन कुछ नहीं होता है। जबकि भारतीय काल गणना के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष के पहले दिन से ही मौसम, वस्त्र, विद्यालयों में नया सत्र, वित्तीय वर्ष, खेतों में फसलें,पर्व आदि मनाने प्रारंभ हो जाते हैं।

इसके अतिरिक्त हिन्दू नववर्ष के दिन ही ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना तथा संवत्सरों का शुभारंभ, नवरात्र का प्रथम दिवस,प्रभु राम चंद्र जी का राज्याभिषेक दिवस सहित अन्य दिवस भी है। इस हिन्दू संस्कृति के प्रथम दिवस पर बक्सर जिला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक अंशुमान जी ने समस्त हिन्दू समाज से अनुरोध किया है कि हिन्दू नववर्ष पर घर एवं मंदिर की सफाई करें। घरों में भगवा ध्वज लगाएं एवं दीप जलाएं।माथे पर तिलक लगाएं तथा प्रसाद बांटें।

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