इस्लाम धर्म के बंदे को दिया सम्मान-बापू

बक्सर नगर के अपनी इस्लाम परंपरा के अनुसार बंदगी करने वाले कुछ इस्लाम धर्म के बंदे यहां आए हैं। परम पूज्य मामाजी के प्रति, व्यासपीठ के प्रति और रामचरितमानस के प्रति, अपना स्वभाव व्यक्त करने के लिए आए हैं। मैं आप सभी का स्वागत करता हूँ।

इस्लाम धर्म के बंदे को दिया सम्मान-बापू

बक्सर अप टू डेट/ए0एन0चंचल- तरण-तारिणी भगवती गंगा के तट पर महामुनि विश्वामित्र जी के शुभ आश्रम में, परम पूज्य खाकी बाबा की स्मृति में और परम पूज्य मामा जी के स्मरण में चल रही रामकथा मानस अहल्या के छठे दिन का प्रवचन रोचक अंदाज में शेरो-शायरी के साथ मनोरंजन पूर्ण माहौल में रामकथा वाचक अंतर्राष्ट्रीय संत मोरारी बापू ने की।

उन्होंने आगे कहा कि मानस अहल्या जो इस कथा का केंद्र बिंदु है। गुरु कृपा से, ग्रंथ कृपा से, ग्रंथि मुक्त संतों की कृपा से, रामचरितमानस के इस बिंदु को हम सात्विक तात्विक विचारधाराओं के संवाद के रूप में हम सब संवाद कर रहे हैं।

उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बक्सर नगर के अपनी इस्लाम परंपरा के अनुसार बंदगी करने वाले कुछ इस्लाम धर्म के बंदे यहां आए हैं। परम पूज्य मामाजी के प्रति, व्यासपीठ के प्रति और रामचरितमानस के प्रति, अपना स्वभाव व्यक्त करने के लिए आए हैं। मैं आप सभी का स्वागत करता हूँ।

यही तो हिंदुस्तान का फितरत है यही हिंदुस्तान का स्वभाव है कि हम ऐसे ही परस्पर प्रीति करते हुए आगे बढ़े। बताते चलें कि कथा प्रारंभ होने के पूर्व बापू के कथा मंच पर सर्वधर्म समभाव का एक झलक देखने को मिला। वे इस्लाम के बंदों से मिले, उनका अभिवादन किये एवं पट्टिका देकर सम्मानित भी किये। इस्लाम धर्म के बंदे को दिया सम्मान-बापू

उन्होंने आगे बताया कि जब मैं कल भिक्षाटन के लिए इसी नगरी के एक मुस्लिम भाई के यहां गया। उन्होंने अपनी शेरो शायरी तरन्नुम में भी सुनाई। लेकिन विशेष आनंद की बात यह भी थी कि आपने किष्किंधा कांड की चौपाईयां यहां के तरन्नुम में पेश की।

फकीरा आए सदा दे गए। मियां खुश रहना, हम दुआ दे गये।।

राम जन्मभूमि के फैसला पर अपना विचार पुनः प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने उस समय उत्तरकाशी के कथा में कहा था कि हनुमान को प्रणाम और रहमान को भी सलाम।

उन्होंने आगे कहा कि अहल्या का जीवन हमारे और आपके लिए दर्पण है। यदि हमारे में काम प्रकटा है तो किसी की रज से ही जाएगा। रामचरितमानस की शुरूआत रज से ही होता है और रज से ही शास्त्र का आरंभ होता है। या तो असंग हो जाए। असंग होना मुश्किल है। मैं तो यहां तक सोचता हूं कि किसी के आशीर्वाद से असंग हो जाऊं या किसी के श्राप से। ये गौतम का श्राप अहल्या के लिए अनुग्रह कर गया।

एक बार मुझे कर्बला पर बुलाया गया और कहा गया कि आप कुछ कहिये। मैंने वहां पर कर्बला का अर्थ लगाया कि जो सबका करे भला उसी का नाम है कर्बला। या तो इबादत से सबका भला कर या मोहब्बत से सबका भला कर।
वो मिली भी तो खुदा के दरबार में गालिब। अब तू ही बता मोहब्बत करूं या इबादत करुं।।

लेकिन बंदगी करो, इबादत करो, मोहब्बत करो, इसी में जगत का भला है, उसी का नाम है कर्बला।

कृष्ण का बेटा काम है और वह हमें अतिरेक के कारण कष्ट में डाल रहा है तो चैतन्य महाप्रभु कहते हैं कृष्ण नाम संकीर्तन से जाएगा। महाप्रभु ने कहा है कि “हम परमात्मा से प्रेम करें वह भक्ति है और परमात्मा हमसे प्रेम करें वो कृपा है।”

सनातन धर्म क्या है? इसकी व्याख्या करते हुए बापू ने कहा कि श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के अनुसार,”सनातन परमात्मा ने, सनातन जीवो के, सनातन दुखों की सनातन निवृत्ति के लिए, जिन सनातन वेदों में, जिन सनातन उपायों का वर्णन किया है, उन्हीं उपायों का सनातन संकलन जो सनातन संहिता का नाम है, वही सनातन धर्म है।”

उन्होंने निर्वाण उपनिषद के आधार पर जीवन जीने की पंद्रह सूत्रों की व्याख्या की।

गगन सिद्धान्त– जिसका सिद्धांत उदार है विशाल है। यानि जिसका सिद्धान्त संकीर्ण नहीं है।
निरालम्ब पीठ– इसका मतलब है अब कहीं नहीं जाना। किसी का सहारा नहीं लेना।
संयोग दीक्षा– भिक्षा बाह्य होती है जबकि दीक्षा अंतरंग होती है। अंतर्यात्रा जो करता है उसको वियोग नहीं होता है संयोग ही होता है। अहल्या का उत्तर पक्ष संयोग दीक्षा है। सच्चे आचार्य से जिसने दीक्षा ली हो उसका वियोग कभी हो ही नहीं सकता। जीसस कहते हैं-“द्वार खटखटाओ, खुलेगा।”

वियोगों उपदेशों- वियोग विरह ही तेरा उपदेश है। इस पर इन्होंने शायरी पेश करते हुए कहा कि,”तेरे चाहने वाले कम ना होंगे। लेकिन तेरी महफिल में फिल्में हम ना होंगे।।”
संतोष पान– परमात्मा जब किसी स्थिति में रख दें और कहीं से कोई किनारा ना दिखे तो संतुष्ट हो जाओ।
उन्होंने कहा कि,” राजी हैं हम उसी में जिसमें तेरी रजा है। इधर भी वाह-वाह है उधर भी वाह वाह है।।”

आनंद माला– कुछ भी हो आनंद में ही रहना वही माला माल है। एकांत गुहायाम मुक्तासने सुख गोष्ठी अर्थात एकांत की गुफा में बैठकर, मुक्त आसन में बैठकर, केवल सुख से ही गोष्ठी करना।
अकल्पित भिक्षासी– जो कल्पना न की हो कि भिक्षा में क्या मिलेगा, वही अकल्पित भिक्षा है।
धैर्य कथा– धैर्य ही तुम्हारी कथा है।

गौतम नारी श्राप बस उपल देह धरी धीर। चरण कमल रज चाहति कृपा करहु रघुवीर।।

उदासीन कॉपिनम– हे साधु! उदासीन वृत्ति तेरी कॉपिन है। परिवार में, समाज में, कभी उदास मत रहना और एकांत में कायम उदासीन रहना। “कितना महफूज हूँ मैं इस कोने में। अब कोई अड़चन नहीं मुझे रोने में।।”
विचार दंड: – ब्रह्म विचार, विवेक विचार, विश्वास विचार, यह तेरा दंड है ।

श्रीयाम पादुका: – लक्ष्मी जिसकी पादुका है, श्रीजी जिसकी पादुका है और जिस महिला का पूर्वार्द्ध कुछ भी हो उतरार्द्ध जब ऐसा हो जाता है तो कीर्ति,श्री,वाक,चनारी राम, स्मृति, मेधा, धृति, क्षमा गीता की सात-सात विभूति उसमें आ जाती है।
पराअपवाद मुक्तों जीवनमुक्त: – दूसरों के अपवाद से मुक्त होना ही जीवन मुक्ति है।
माया ममता अहंकार दहनम– माया, ममता और अहंकार उसका उसका दहन करें।

श्मशाने अनाहतांगी– श्मशान में रहकर के मसान की भस्म अपने अंग पर धारण करती हैं बाकि कोई पोशाक नहीं पहनती।
ब्रह्मचर्य शांति ग्रहणाय-ब्रह्मचर्य द्वारा शांति की प्राप्ति होती है।
उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि गंभीरता, कुछ करने का इरादा लेकर निकलोगे तो ये 15 के 15 सूत्र हम संसार में रहकर भी अपना सकते हैं और अपना लक्ष्य पा सकते हैं। रामचरितमानस के आधार पर सतियों की गणना में अहल्ला प्रथम स्थान पर हैं, और संतों की गणना में भरत का पहले स्थान पर हैं।

कथा क्रम के दौरान गुजराती रास कराकर के दर्शकों को नाचने पर उन्होंने विवश कर दिया। कथा के क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने के दशरथ नन्दन के चारों पुत्रों के नामकरण संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार,गुरुकुल विद्या अध्ययन, विश्वामित्र आगमन, ताड़का सुबाहु वध और महामुनि विश्वामित्र के यज्ञ को पूर्ण कराया।अंत में मानस जी की आरती में बिहार पुलिस के जवानों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया और आरती भी की।

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