आखिर क्यों मनाई जाती है आज ही दीपावली

दीपावली एक ऐसा पर्व जिसके नाम लेने से मन मे रंग-बिरंगे प्रकाश की आभा मचल उठती है, एक ऐसा पर्व जिसके नाम जेहन मात्र में आ जाने से सफाई और पर्यावरण की तरफ अन्यास ही ध्यान जागृत हो उठता है ।

 

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बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- दीपावली एक ऐसा पर्व जिसके नाम लेने से मन मे रंग-बिरंगे प्रकाश की आभा मचल उठती है, एक ऐसा पर्व जिसके नाम जेहन मात्र में आ जाने से सफाई और पर्यावरण की तरफ अन्यास ही ध्यान जागृत हो उठता है । कहते है कि इस दिन भगवान राम, माता सीता और अनुज लक्ष्मण अपने वनवास की समय अवधि को पुरा कर के अयोध्या लौटे थे, और अयोध्यावासियों ने अपने भगवान के आगमन के स्वागत के लिये पुरे अयोध्या को प्रकाशित कर अपने भगवान का स्वागत किया था ।

द्वापर युग के कथा के अनुसार प्रागज्योतिषपुर नगर का राजा नरकासुर नामक दैत्य था । वह बहुत ही कुर राक्षस था, उसने अपनी शक्ति से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवताओं पर अत्याचार करना शुरू कर दिया था । वह महिलाओं को कैद कर के रखता और उनके साथ बुरा व्यवहार करता था, उसे एक श्राप मिला था कि उसकी मौत किसी महिला के हाथ ही होगी । उसने संतों आदि की 16 हजार स्त्रीयों को भी बंदी बना लिया था । उसके अत्याचार से सभी परेशान थे । अंत मे भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें नरकासुर से मुक्ति दिलाने का आश्वसान दिया। भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया ।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाईads buxar

इस प्रकार श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध कर देवताओं व संतों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई। उसी की खुशी में दूसरे दिन अर्थात कार्तिक मास की अमावस्या को लोगों ने अपने घरों में दीए जलाए। तभी से नरक चतुर्दशी तथा दीपावली का त्योहार मनाया जाने लगा । यह दिन भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी है। इन सभी कारणों से हम दीपावली का त्योहार मनाते हैं ।

आज की दीपावली पर यदि हम निगाह दौड़ाये तो हम पाते है कि वो पुरानी मिट्टी के दीयों, मोमबत्तियों के जगह आधुनिक बिजली वाली मोमबत्तियों तथा बिजली झालर ने ले लिया है । एक वर्ग जहाँ इसका विरोध करता है और दूसरा वर्ग उनके विरोध का विरोध कर जनाजा निकालने से नही चुकता । तथाकथित कुछ राष्ट्रवादी एक तरफ तो जहाँ इसका विरोध कर आम जन को जागरूक करने का प्रयास करते नजर आते है तो दूसरी तरफ बाजार की चकाचौंध में खुद को डूबो देने से भी नही चुकते ।

धीरज पाण्डेय

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