प्रशासन को चिंता नही, टूटकर बिखर रहा है इतिहास

बिहार के राजधानी शहर पटना से 130 किमी दूर बक्सर ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बिहार के पर्यटन स्थलो में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुये है ।पर अब टूटकर बिखर रहा है और प्रशासन को इसका चिंता तक नही

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प्रशासन को चिंता नही, टूटकर बिखर रहा है इतिहास

बक्सर अप टू डेट न्यूज़/सम्पादकीय :- बक्सर शहर पूर्वी उत्तर प्रदेश सीमा के किनारे भारत के पूर्वी राज्य बिहार का एक ऐतिहासिक शहर है जो प्रसिद्ध बक्सर की लड़ाई और चौसा की लड़ाई के लिए जाना जाता है। बिहार के राजधानी शहर पटना से 130 किमी दूर बक्सर ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बिहार के पर्यटन स्थलो में अपनी एक अलग पहचान बनाये हुये है ।

ऐसे तो बक्सर में ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों की भरमार है । इनमें से एक है बक्सर का किला….. जो आज बक्सर में रहकर,बक्सर के लोगो के सामने एक अजनबी बुत सा बना अपनी दस्तान बयां करते-करते अब समाप्त होने के कगार पर पहुँच गया है ।

ना जाने कितने मंत्री, सांसद  और विधायक का बना सभा स्थल

अपने विशालकाय स्वरूप के कारण बक्सर को एक नई पहचान देने वाला, बक्सर शहर के ह्रदय स्थल में स्थित बक्सर का किला, जिसने न जाने कितने शासक,प्रशासन मंत्री, विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री के सभा स्थल को खुद में समेटा हो आज अपनी दुर्दशा पर आँसु बहा रहा है ।

बक्सर के सुदूर इलाको के लिये एक पहचान के रूप में जाना जाने वाला बक्सर किला आज अपनी कहानी बयां करने पर मजबूर है ।आज यह किला टूट कर बिखर रहा है। इसे संरक्षित नहीं किया जाएगा तो वह दिन दूर नहीं जब इसे आने वाली पीढ़ियां सिर्फ और सिर्फ किताबों में ही देखेगी।

परमार वंश के राजा रुद्रदेव ने सन् 1111 ई. में कराया था किला का निर्माण

बता दें कि इस किला का निर्माण परमार वंश के राजा रुद्रदेव ने सन् 1111 ई. में कराया था। इस किले में इतिहास के कई तथ्य छिपे हैं। ऐतिहासिक किला के उत्तर तरफ का हिस्सा कटाव के कारण गंगा में समा रहा है, वहीं दक्षिण तरफ का बड़ा हिस्सा टूट कर जमींदोज हो गया है। टूटे हुए हिस्से के पास से हर रोज मिट्टी सरक रही है। खास तो यह है कि इस ऐतिहासिक किले की रत्तीभर चिंता ना तो शासन को है और ना ही प्रशासन को। सब आते है, और उसी बक्सर के किला के ह्रदय में ठहर कर ना जाने कितने झूठ और सच से उस किले की धड़कनों को बेधते रहते है……..

ऐतिहासिक किले को संरक्षित करने का भरोसा सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया था। 31 जनवरी 2017 को राजपुर में सात निश्चय के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आयोजित जन सभा में बक्सर के किले को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने व संरक्षित करने की बात कही थी। यहां पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी जांच के लिए आये । बावजूद आज तक किले को विकसित करने और पुराने प्रारुप में लाने का मामला खटाई में पड़ा है।

किला निर्जीव अपनी विवसता पर आँसु बहाते हुये सैकड़ों गाड़ियों के नजर से ओझल हो जाता है ।

खास तो यह है कि इस किला के मैदान से महज 100-200 मीटर के फासले पर स्थित अतिथि भवन में न जाने कितनी बार और न जाने कितने जनप्रतिनिधियों की टोली आती है और वापस चली जाती है लेकिन बक्सर का किला निर्जीव अपनी विवसता पर आँसु बहाते हुये सैकड़ों गाड़ियों के नजर से ओझल हो जाता है ।

बक्सर में किसी बड़े आयोजन की बात हो या मुंडन संस्कार में दूर दराज से आये लोगो की तमाम गाड़ियों को अपने अंदर समाहीत करने वाला बक्सर का किला….. शहर के भिड़ कम करने और शहर के लोगो का एक मात्र सहारा बक्सर के किले का मैदान का कब कायापलट होगा ये सवाल बक्सर का हर एक नौजवान जानना चाहता है जो एक साथ न जाने कितने खेलो और खिलाड़ियों के चेहरे पर मुस्कान की आभा ला देने का दमखम रखने वाला बक्सर का किला……

धीरज पाण्डेय

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